किशनगढ़ शहर की समस्याओं पर एक पैनी नज़र ।

किशनगढ़ शहर की समस्याओं पर एक पैनी नज़र ।

चुनावी बादल छँट चुके हैं और किशनगढ़ नगर परिषद में नया बोर्ड बन गया है।नये तरोताज़ा चेयरमैन और उनकी टीम मुस्तैदी से काम करने की शपथ लेकर अपना पदभार संभाल चुकी है । अब जनता पुराना सब कुछ भुलाकर नयी जोशयुक्त नगर परिषद से अपने किशनगढ़ का उद्धार करवाने की चाहत रखती है ।यह कोई बड़ा मुश्किल काम भी नहीं है तब जब इस शहर की माटी से वहाँ के सांसद है , वहाँ के विधायक है, वहाँ के सारे नगर परिषद के सदस्य है, उस शहर का विकास न होना यह तो असंभव है ।पर इसके लिए जनता को जागरूक होना पड़ेगा । अपने माटीइंसान के लिए हमें अपने इन्हीं जन प्रतिनिधियों से अपना उधार करवाना है ।

तो देखते हैं , हमारी समस्याएँ -जिन्हें हमें सुधारना है ।

१.किशनगढ़ की हार्टलाइन मेन रोड की समस्या

२. सीवरेज लाइन का सुचारु रूप से संचालन हो

३.शहर की सफ़ाई व्यवस्था में सुधार हो

४. स्ट्रीट लाइटों का व्यवस्थित रूप से संचालन हो

५ .बिजली समस्या का समाधान हो

६.पानी की समस्या का समाधान

७..ट्रैफ़िक कंट्रोल सुचारु हो

८.. अतिक्रमण से निजात मिले

९.. पार्किंग समस्या का समाधान हो

१०.. शहर को सेहतमंद बनाना

शहर में पार्क और ओपन जिम का निर्माण ।

तो आइए ,इन समस्याओं पर डालते हैं एक पैनी नज़र।

1. किशनगढ़ शहर की हार्ट लाइन मेन रोड की समस्या

मार्बल नगरी के नाम से पूरी दुनिया में विख्यात इस शहर की एक ही हार्ट लाइन है “मेन रोड “ जिसकी हालत हम किशनगढ़ वासियों से छुपी हुई नहीं है। बेतरतीब ट्रैफ़िक , पार्किंग का अभाव , टूटी हुई सड़कें , झूलते विद्युत पोल और हाई टेंशन लाइनें , मुक्त विचरण करते जानवर ,कहीं भी खड़े होकर सवारियों का इंतज़ार करते ऑटो रिक्शा , आधी से ज़्यादा सड़क पर लगी दुकानें और ठेले। क्या नहीं है इस एक हार्ड लाइन पर!

सतत प्रयास किए जा रहे हैं इस मेन रोड को दुरुस्त करने के लिए पर यह घाव ऐसा है कि ठीक होने की बजाय दिनोंदिन नासूर ही बनता जा रहा है ।अब तो इसका एक स्थायी उपाय करना ही ठीक रहेगा।

स्थायी उपाय तो एक ही नज़र आता है वो है ,

किशनगढ़ शहर के नए बस स्टॉप से लेकर हाउसिंग बोर्ड तक एक “ओवर ब्रिज “ बनाया जाए जिससे यहाँ की जनता को राहत मिल सके और बेवक्त जान गंवाने वाले कुछ और पल जी सके । पूरा प्रशासन , सांसद , विधायक ,सभी अपने शहर के लिए अपनी माटी के लिये अगर एक साथ संकल्प कृत हो जाए तो वो दिन दूर नहीं जब हम इस हार्टलाइन मेन रोड का उद्धार कर सके।

2. सीवरेज लाइन का सुचारु रूप से संचालन हो

बरसों से किशनगढ़ शहर की सड़कों की खुदाई होती हुई सबने देखी। परेशानियाँ उठाकर वे दिन बिताएँ ।कितनों ने एक्सीडेंट में अपनी जान गंवायी और कितनों ने ही अपने हाथ पैर तुडवाएँ। पर जनता ने कभी उफ़ तक नहीं की ।शायद उन्हें उम्मीद थी कि हमारे शहर का उद्धार होगा ।गंदी , सड़ी हुई , कचरे से अटी नालियों से उन्हें निजात मिलेगी ।सारा गंदा पानी शहर की सड़कों पर फैलने के बजाय सीधा सीवरेज लाइन में जाकर ,शहर स्वच्छ होगा ,रोग मुक्त होगा ।हमारी सेहत सुधरेगी । पर क्या वाक़ई ऐसा हुआ ?अब नया बोर्ड बन चुका है ,नगर परिषद मुस्तैद है ,तो जनता चाहती है कि शहर की इस समस्या का समाधान जल्द से जल्द हो।

3. शहर की सफ़ाई व्यवस्था में सुधार हो।

शहर की सफ़ाई व्यवस्था सुदृढ़ हो ।हर गली में बड़ें डस्टबिन लगे ।हर दुकान के बाहर डस्टबिन हो , हर एक वेंडर के पास , हर एक सब्ज़ी वाले के पास डस्टबिन होना अनिवार्य हो ।रोज़ सुबह – शाम नगर परिषद की गाड़ियां गस्त करें और सारा कचरा उठाकर ले जाए , सारे डस्टबिन रोज़ ख़ाली हो ,घर घर कचरा संग्रहण करके सफ़ाई कर्मचारी इकट्ठा करके शहर की इस समस्या को सुलझायें ।नागरिकों को अपनी ड्यूटी का ज्ञान हो , सरकार को अपने कर्तव्यों का भान हो ।कड़े नियम और नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है ।जब सरकार ख़ुद अपना काम मुस्तैदी से करें , शहर की सफ़ाई नियमित समय पर हो । अगर नहीं , तो उन्हें भी जुर्माना देना पड़े ।जनता इसका जवाब माँग सकती है।

4. स्ट्रीट लाइटों का व्यवस्थित रूप से संचालन हो ।

बेतरतीब खड़े पोल , ट्रांसफॉर्मर और झप झप करती स्ट्रीट लाइटें किसी भी तरीक़े से स्मार्ट सिटी या ख़ूबसूरत शहर की पहचान नहीं हो सकती ।नगर परिषद को इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट से समन्वय बिठाकर इसका निवारण करना होगा ।और शहर को सुंदर और रोशनी भरा भरा बनाने में सहयोग करना चाहिए।

5. बिजली समस्या का समाधान हो।

बिजली का आना -जाना और “बत्ती गुल -मीटर चालू” वाली जो समस्या है उससे शहरवासियों को निजात दिलाना महत्वपूर्ण है ।पढ़ाई करने वाले बच्चों की आँखों का ख्याल भी तो हमें ही रखना होगा ।बिजली की समस्या और जनता की परेशानी का निवारण अब प्रशासन के हाथ में है ।बिजली चोरी वालों पर सख़्त कार्रवाई करने का काम भी डिपार्टमेंट का ही है ।उन्हें रियायत देकर दूसरों पर अन्याय करना न्याय संगत नहीं है ।

6. पानी की समस्या का समाधान हो।

“जल ही जीवन है ।” इस अमृततुल्य जल का वितरण सुचारु हो ।पाइप लाइन से लीकेज होने वाले इस नीर को बचाया जाएँ ।सामान जल का वितरण हर जगह हो। कहीं पर ज़्यादा समय और कही पर कम समय के लिए जल का वितरण ना हो। नल का पानी वक़्त -बेवक्त समय पर न छोड़ा जाए।वक़्त पर पानी की सप्लाई हो ताकि

आम जन नल आने के इंतज़ार में अपना वक़्त ज़ाया न करें । फिक्स वक़्त होने पर वे अपना क़ीमती समय बचा सकेंगे और अपना काम सुचारु रुप से कर सकेंगे।

7. ट्रैफ़िक कंट्रोल सुचारु हो

इस शहर के ट्रैफ़िक का भगवान ही मालिक है ।हमारे शहरों में अगर किसी ने अपना वाहन चला लिया , मतलब वो इंसान पूरी दुनिया में वाहन चला सकता है , ऐसा आम जनता का मानना है। ट्रैफ़िक कंट्रोल ठीक तरह से हो ।ट्रैफ़िक लाइट का संचालन सुचारु हो । ट्रैफ़िक नियमों का कडाई से पालन हो वरना जुर्माना । फिर कोई बीच का रास्ता ना हो , जुर्माना बचाने का ।जहाँ गलती हो वहाँ सख़्ती ज़रूरी ।पर बेवजह इंसान को परेशान न किया जाए ।जनता में जागरूकता लाना , पैदल राहगीरों के लिए फुटपाथ हो , उस पर किसी दुकानों का अतिक्रमण ना हो ।

ट्रैफ़िक कंट्रोल अगर हम कर पाए तो इस शहर की आधी से ज़्यादा समस्याओं का समाधान हो पाएगा ।

8. अतिक्रमण से निजात मिले।

लोगों की सोच को बदलना और सरकारी संपत्ति सरकार की ही है , उस पर हमारा अधिकार नहीं है ,यह सोच पैदा करना मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं है । दुकान की जगह से ज़्यादा तो दुकान के बाहर की जगह दुकानदार अपनी दुकानदारी के लिए इस्तेमाल करके , पार्किंग की जगह ,पैदल चलने वालों का रास्ता सभी को खा जाते हैं ।और हम दोष देते हैं प्रशासन को ।हमें स्वयं के गिरेबान में भी झांक कर देखना चाहिए । प्रशासन का एक ही काम -इस अतिक्रमण जो अस्थायी रूप से बनाया जाता है रोज़ सुबह दुकान खोलने पर उस पर सख़्त से सख़्त एक्शन ली जायें और इस समस्या का स्थाई निराकरण हो । प्रशासन को इसे अपनी प्राथमिकता में शामिल करना चाहिए तभी इस शहरकी अतिक्रमण समस्या का निराकरण हो पाएगा।

9. पार्किंग समस्या का समाधान हो ।

जहाँ तहाँ खड़े वाहन ।किसी को किसी से कोई मतलब नहीं ।जहाँ मन करे वहाँ वाहन खड़ा कर दिया और चल दिये अपने काम के लिए ।जनता को पार्किंग प्लेस मुहैया करवाना और जनता उसका पालन करते हुए पार्किंग प्लेस पर ही अपना वाहन खड़ा करें और थोड़ा सा पैदल चलें ।और ध्यान रहे ,पैदल चलना सेहत के लिए अच्छा होता है ।दुकान के सामने रुककर पूरा ट्रैफ़िक को जाम करना कोई शौर्यवाला काम नहीं है ।

प्रशासन को पार्किंग स्थानों का चयन करके उसका सुचारु संचालन या तो स्वयं करें या प्राइवेट सेक्टर को देकर इस समस्या का निराकरण करना आवश्यक है ।अगर पार्किंग समस्या का समाधान कर पाए तो शायद ट्रैफ़िक समस्या अपने आप नियंत्रित हो जाएगी ।ऑटो स्टैंड का चयन करके ऑटो उसी स्थान पर रोके जाएँ। हर राह चलते इंसान के हाथ देने पर ऑटो रोकना जुर्माने का हक़दार माना जाए ।अनुशासन पैदा करना और उस पर अमल करवाना प्रशासन का पहला क़दम होना चाहिए।

10. शहर को सेहतमंद बनाना

जनता की सेहत का ख़याल रखना और शहर का विकास और शहर में पार्क और ओपन जिम का निर्माण ।

“हेल्थ इज़ वेल्थ “. जनता के लिए वॉकींग ट्रैक , पार्क और ओपन जिम का निर्माण करना ।

अगर जनता तंदुरुस्त हो तो पूरा शहर तंदुरुस्त रहता है ।

पेड़ों का संरक्षण ।अपनी विरासतों का सौंदर्यीकरण ,हर उस छोटी -बड़ी जगह का ख्याल करना और इस शहर के

जन वासियों के लिए कुछ ऐसे स्थान बनायें जहाँ वो कुछ पल सुकून के बिता सकें या कुछ पल सुस्ता सके ।

इस भाग दौड़ वाली ज़िंदगी से कुछ सुकून के पल अपने लिए चुरा सके।

इस 10 सूत्री हमारी माँगो पर नगर परिषद के नए बोर्ड को सोचना चाहिए और तुरंत अमल करने की कार्रवाई करनी चाहिए ।अगर जनता ख़ुश तो आपका नगर परिषद हमेशा वाहवाही लूटता रहेगा ।

मानती हूँ , समस्याएँ अनेक है पर इसका निवारण एक है

“प्रशासन का दृढ़ संकल्प और जनता का अनुशासन “

अगर ये दोनों मिल जाए तो वो दिन दूर नहीं जब हमारा शहर भी एक सुंदर ,ख़ूबसूरत ,खिलखिलाता हुआ शहर बन जाएगा और हमें यहाँ पर किसी मेहमान को बुलाने में शर्म महसूस नहीं होगी बल्कि गर्व महसूस होगा ।

जिस शहर में ख़ूबसूरत एयरपोर्ट हो , रेलवे स्टेशन हो और सुंदर बस स्टैंड हो उस शहर की यह दशा अगर सुधर जाएं तो इस माटी पर भी स्वर्ग बन जाएगा।

डॉक्टर मंजू राठी

MBBS MD

LLB LLM

5 thoughts on “किशनगढ़ शहर की समस्याओं पर एक पैनी नज़र ।

  1. Phlye purani mill choraha se nagerparisad tk GOREV PETH ben rha tha uskye liye sabse phalye pure pedo ko kat diya pr gorev peth nhi bena..pta nhi sebhapati ko pedh he katnye the kya …

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  2. आप का ख्याल बहुत अच्छा है
    लेकिन कौन कितना ईमान दार है इस पर निर्भर करता है
    जब तक सभी विभागों मे सामन्जस्य होना जरूरी व नेताओं और अफसरों दिलो मे शहर के प्रति वफादारी होना
    खयाल अपना मिजाज अपना पसंद अपनी कमाल क्या है
    जो यार (जनता) चाहे वो हाल अपना बना के रखना कमाल ये है
    किसी की राह से खुदा की खातिर
    उठा के कांटे हटा के पत्थर
    फिर उस के आगे निगाह अपनी
    झुका के रखना कमाल ये है

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