गुड बाय

मीना अभी-अभी कमरे में आई थी। दो दिन की असीम थकान के बाद वह कुछ पल सुस्ताने आई थी। अंदर आते ही अपने पति की बड़ी सी तस्वीर के सामने खड़ी होकर वह उसे निहारती है और उसकी आंखों से आंसूओं की झड़ी लग जाती है। दो दिन से दिल में रोका हुआ गुब्बार आंसूओं के रूप में बहकर उसके मन को हल्का करने की कोशिश कर रहा है।रोते-रोते ही वह अपने पति से कह रही है ,
“देखा तुमने, आज तुम्हारी बेटी इस घर से विदा हो गई। आज इस घर से उसकी डोली उठ गई । कितनी प्यारी लग रही थी तुम्हारी बेटी शादी के इस जोड़े में! लाल जोड़े में सज धज कर जब वह तुम्हारे पास आशीर्वाद लेने आई थी तब तुम्हारा उसे गले लगाने का मन तो किया होगा ना ! पर तुम भी क्या कर सकते थे? मन मार कर रह गए होंगे। पर पर—- अपनी बिटिया को खूब सारा आशीर्वाद दिया होगा, उसके लिए भगवान से प्रार्थना की होगी कि उसका नव दांपत्य जीवन सुखी रहे।” वह कुछ देर अपने पति को ऐसे ही देखती रही।
” तुम चले गए , बीच मझधार में मुझे अकेला छोड़ कर चले गए। उस वक्त की छोटी -सी ,नन्ही -सी गुड़िया आज अपने पति के साथ इस घर से रुखसत हो गई। मैंने अपना कर्तव्य निभाया, कन्यादान कर दिया । इस घर से विदा होते वक्त वह खूब रोई थी।तुम्हारी याद भी उसे बहुत आई थी।मेरा भी दिल रो रहा था पर मैंने उसके सामने अपनी आंखों से एक आंसू का कतरा भी नहीं बहने दिया। मैं उसे कमजोर नहीं होने देना चाहती थी। उसे कभी एहसास नहीं होने दिया कि उसकी मां उसके बिना नहीं जी पाएगी। मैंने उसे खुशी खुशी विदा किया। देखा था ना तुमने, मैं कितनी मजबूर थी, चाह कर भी मैं उसे अपने पास नहीं रोक पाई। अब तुमसे एक विनती है , उसपर अपना आशीर्वाद बनाए रखना ,उसे अपने भावी जीवन में कभी कोई परेशानी का सामना न करना पड़े । उसे हिम्मत देना और जिसके तुम बहुत करीब हो उस भगवान से कहना तुम्हारी लाडो को हमेशा खुश रखे। उसके नए परिवार में वह हमेशा खुश रहे। “
मीना लगातार रो रही थी , रोते-रोते ही वह अपने पति से कह रही थी,
“मैं अब थक गई हूं, सारी जिम्मेदारियां निभाते निभाते अब मैं वाकई थक गई हूं ।” वह धड़ाम से बिस्तर पर गिर पड़ी। इतने दिनों की शादी की भाग दौड़ में उसने पलक भी नहीं झपकाईं थी । अब जैसे ही बेटी को विदा किया उसकी हिम्मत टूट गई और वह निढ़ाल होकर बिस्तर पर गिर गई। वह अपने पति के पास अपना दिल हल्का करना चाहती थी। अपने पति की याद में वह बहुत तड़पती थी । उसके बिना ही उसने पूरी शादी का कार्यक्रम पूरा किया था , धूमधाम से अपनी बेटी की शादी की थी। लेकिन दिल का एक कोना हमेशा खाली था जहां वह अपने पति को बसाए अपने कर्तव्य पूरे कर रही थी।
पति की हर पल सताती याद और अब बेटी का इस घर से विदा होना उसके दिल में एक गहरा खालीपन पैदा कर गया था। सबके सामने अपने दुख को छुपा कर मुस्कुराते -मुस्कुराते वह थक गई थी। अब उसे रोना था ,अपना मन हल्का करना था । बेटी को दुख ना हो इसलिए उसे भी उसने हंसते-हंसते विदा किया था । लेकिन अब वह अपना मन अपने पति के सामने हल्का कर रही थी ।
मीना की आंखों के सामने बारा साल पहले का चलचित्र चल रहा था । उस दिन भी वह अपने कमरे में आकर ऐसे ही रो रही थी जब उसके पति ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। वह अपने अतीत में चली गई। उसका भरा पूरा परिवार था, सास -ससुर, पति, दो प्यारे बच्चे और ढेर सारे रिश्तेदार । वह खुद डॉक्टर थी तो उसके पति भी डॉक्टर थे । उनका खुद का एक बड़ा सा अस्पताल था । एमबीबीएस पूरा करते ही उसकी शादी हो गई और जल्दी ही गर्भवती होने की वजह से उसका आगे पढ़ने का और पोस्ट ग्रेजुएशन करने का सपना अधूरा रह गया था । बच्चों की परवरिश और घर संभालने की जिम्मेदारी ने उसने सरकारी नौकरी करना ही ठीक समझा ताकि घर और ड्यूटी दोनों अच्छे से निभा सके । जिंदगी अच्छी कट रही थी। पति का अस्पताल काफी अच्छा चल रहा था ।उन्होंने अपने आप को काफी अच्छा पति और पिता साबित किया था ।सब कुछ अच्छा चल रहा था कि अचानक एक दिन उसके पति की तबीयत खराब हो गई और उसे अस्पताल में भर्ती करवा कर जब सारे टेस्ट किए गए तो पता चला कि उसे एक तरह की दिल की बीमारी है जो कभी ठीक नहीं हो सकती। और वक्त के साथ-साथ वह बढ़ती जाएगी, जो दवाइयां उपलब्ध है उससे सिर्फ वक्त बिताया जा सकता है लेकिन उसका पूरा इलाज नहीं हो सकता । डॉक्टर होने के नाते यह सत्य दोनों ही जानते थे और उन्होंने इस सत्य को स्वीकार भी कर लिया था। मीना अपने पति का पूरा ख्याल रखती थी, वक्त पर दवाइयां देना ,वक्त पर खाना पीना करना और क्या नहीं खाना, क्या खाना इस पर वह पूरा ध्यान देती। उसके पति स्वस्थ तो दिखते थे पर उन्हें भी पता था कि उनके पास कुछ सालों का ही वक्त है । बच्चे अभी छोटे थे तो उन्होंने उनके भविष्य के लिए काफी हद तक इंतजाम कर दिया था। जिस इंसान को अपने जाने का समय पता हो वह पहले से ही सचेत हो जाता है और अपने परिवार को उसके बाद तकलीफ ना हो इसकी तरफ उसका पूरा ध्यान रहता है और वह उस लक्ष्य को केंद्रित करते हुए आगे बढ़ता है । उसने अस्पताल चलाने के साथ-साथ प्रॉपर्टी भी खरीद कर रखी थी ताकि मीना को उसके जाने के बाद तकलीफ ना उठानी पड़े। अपने अस्पताल में भी नए डॉक्टर रख लिए थे ताकि उसके जाने के बाद वह अस्पताल भी सुचारू चलता रहे और उनके भविष्य में कोई कठिनाई पैदा ना हो। जब तक बच्चे बड़े नहीं हो जाते तब तक तो मीना को ही यह सारी चीज़ें संभालनी थी।
आदमी को जब अपनी मौत सामने दिखाई देती है तो उसे अपनी कम बल्कि अपने परिवार की चिंता ज्यादा सताती है। उसके जाने के बाद वह कैसे जिएंगे, उन्हें कोई तकलीफ तो नहीं होगी ,उसी के बारे में वह सोचता रहता है ।यह एक मानव प्रवृत्ति है जिसे कोई नहीं बदल सकता। यह अपने परिवार के प्रति उसका प्यार और कर्तव्य ही दर्शाता है । अब उसकी जिम्मेदारियां उसके लिए ज्यादा मायने रखती थी।
मीना के पति भी अपना पूरा ध्यान रखते थे । वक्त पर दवाइयां लेना, रेग्युलर चेकअप करवाना और जो भी नई तकनीक इस बीमारी में आती थी वह उसे अपनाते। पर इस दिल की बीमारी का अभी तक बहुत ज्यादा इलाज नहीं आया था और उनके पास ज्यादा से ज्यादा कुछ वर्ष और थे । किस्मत में जो लिखा होगा वह हो ही जाएगा तो फिर जो जिंदगी बची है उसे हंसते-हंसते बितानी है ,यही उन्होंने स्वीकार किया। और यह सही भी था । रोज यह सोचकर कि मैं मरने वाला हूं और पल-पल मरने से अच्छा है कि दिल खोलकर जो पल बचें हैं उन्हें हंसकर जीने में ही अक्लमंदी थी। और यही जिंदगी का दस्तूर है।
” जिंदगी की राह में मुश्किलें जरूर होगी लेकिन जो दिल
खोलकर जीते हैं वे मुश्किलों से पार पा जाते हैं।”
यही मीना और उसके पति की सोच थी। अपने सारे बिजनेस की जानकारी, अपने प्रॉपर्टी की जानकारी ,अपने पैसों की जानकारी ,अस्पताल की पूरी जानकारी उन्होंने मीना को पहले से ही दे दी थी ताकि उनके जाने के बाद मीना को कोई परेशानी ना हो। घर की समृद्धि पैसों से नहीं , इंसानों से है यह तो दोनों ही जानते थे पर मजबूर थे। वक्त हाथ से फिसलता जा रहा था । बच्चे अभी छोटे थे, उन्होंने अभी कॉलेज में भी कदम नहीं रखा था लेकिन यमराज इस बात को नहीं समझते थे और एक दिन उन्होंने उनके प्राण छिन ही लिए। मीना का सुहाग उजड़ गया था, उसके पति ने उसे हमेशा के लिए “गुड बाय” कह दिया था । वह उस दिन बहुत रोयी थी । सब कुछ जानते हुए भी वह अपने आप को संभाल नहीं पाई थी। उस वक्त उसका साथ उसके मासूम बच्चों ने दिया था । उन्होंने अपनी मां को समझाया , “मां, आप चिंता ना करें , हम है ना आपके पास। पापा भले ही अपने साथ ना हो पर आप के यह दोनों बच्चे आपका साथ कभी नहीं छोड़ेंगे । “
बच्चे वक्त से पहले ही बड़े हो गए थे । खेलने कूदने की उम्र में उन्होंने मां के साथ परिवार की जिम्मेदारी उठा ली थी। धीरे-धीरे वक्त बितता गया । मीना ने अस्पताल की जिम्मेदारी संभाल ली, उसने अपनी नौकरी भी जारी रखी और सास ससुर और बच्चों की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही थी।
दो साल बाद बेटी का मेडिकल में एडमिशन हो गया, वह हॉस्टल चली गई और उसके जाने के दो साल बाद उसके बेटे का भी मेडिकल में एडमिशन हो गया और वह भी हॉस्टल में रहने चला गया और फिर से सारी जिम्मेदारी मीना पर आ गई थी। बच्चों को तो डॉक्टर ही बनना था । पापा का अस्पताल जो चलाना था , उसे और ऊंचाइयों पर ले जाना था । धीरे-धीरे बच्चे आगे बढ़ते गए और दोनों बच्चों ने पोस्ट ग्रेजुएशन भी कर लिया और अपने अस्पताल की जिम्मेदारी भी संभाल ली ।
अब मीना को अपनी बेटी की शादी की चिंता सताने लगी। उसने अपनी बेटी के लिए अच्छे वर की तलाश शुरू कर दी। कई रिश्ते आए उस होनहार बच्ची के लिए पर कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ कमी लड़के में देखकर वह पीछे हट जाती। पर उसने हार नहीं मानी और एक दिन उसे वह दामाद मिल ही गया जिसका उसे इंतजार था , बहुत ही सुंदर, सुशील डॉक्टर लड़का उसे अपनी लाड़ो के लिए मिल ही गया। बड़े ही धूमधाम से उसने अपनी बेटी की शादी की ताकि कोई यह ना कहे कि बिन बाप की बेटी के ब्याह में कमी रह गई। उसके बेटे ने और उसने अपनी तरफ से शानदार प्रोग्राम किए। सभी नाते रिश्तेदार आए और दोस्तों की मौजूदगी ने इस शादी में चार चांद लगा दिए । मीना ने सबका दिल से स्वागत किया और पूरे वक्त वह खुश नजर आ रही थी। बेटी की शादी की रस्में जब चल रही थी तब कई जगह पर उसकी आंखें नम हो जाती थी पर उस वक्त उसकी बेटी और बेटे का साथ पाकर वह फिर मुस्कुराने लग जाती । इस तरह आज बेटी इस घर से विदा हो गई ।उसकी एक और जिम्मेदारी पूरी हो गई ।दामाद के रूप में उसे एक और बेटा मिल गया । कई बार रिश्तेदारों ने उसका साथ छोड़ दिया था पर उसने कभी हिम्मत नहीं हारी। जब उसके ससुर जी इस दुनिया से विदा हुए तब वह फिर एक बार डगमगा गई थी पर उसने जल्दी अपने आप को संभाल लिया था।
जिंदगी में ऐसे मोड़ आते हैं पर जो हिम्मत से आगे बढ़ जाता है वही जिंदगी की यह जंग जीत जाता है, मीना को यह पाठ उसके पति ने अच्छी तरह से पढ़ाया था और मीना उसी के बताए रास्ते पर चल रही थी। आज बेटी को रुखसत करके वह अपने पति को यही बता रही थी ,” तुम्हारे बताए रास्ते पर मैं चल रही हूं पर हर पल तुम मुझे याद आते हो । मेरी मुस्कुराहट के पीछे जो दर्द छुपा हुआ है वह सिर्फ तुम ही समझ सकते हो। पर मैं यहीं पर रुक नहीं सकती । मेरी एक जिम्मेदारी अभी भी बाकी है , हमारे बेटे की गृहस्थी बसाना । बेटे की यह जिम्मेदारी पूरी करके मैं भी तुम्हारे पास आकर तुम्हारे साथ सुकून से जीना चाहती हुं, तब तक के लिए “गुड बाय।” जिंदगी का यह शो चलता रहना चाहिए — दी शो मस्ट गो ओन।” और उसने अपने पति को “गुड बाय” कह दिया ।
“गुड बाय, माय डियर! गुड बाय! “
डॉ मंजू राठी
एमबीबीएस एमडी
एलएलबी एलएलएम









