चुनावी बिगुल

जागो ! जनता जागो!

अख़बार में फ़ोटो देखी, आधे पेज के विज्ञापन में सरपंच बनी महिला का माला पहने हुए कोने में एक छोटा -सा फ़ोटो और मालाओं से लदा हुआ उनके पति का पूरा फ़ोटो और नीचे लिखा था “सरपंच का पत्ती “ ।

वाह ! देखकर अनायास ही हँसी आ गई । सरपंच बनी वो महिला और वाहवाही ले रहा था उनका पति। जनता ने किसे सरपंच चुना ? सवाल मन में उठ खड़ा हुआ । जनता ने किसे वोट दिया ? क्या जनता को इतना भी वक़्त नहीं मिला कि वह यह सोचे कि वो किसे चुनकर अपना नेता बना रही है ? पूरे गाँव में एक ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जिसे जनता चुनें और वो पूरी मेहनत से जनता के लिए काम करें।

जैसे ही चुनावी बिगुल बजता है, सारी पार्टियां अपने नाते , रिश्तेदारों या दोस्तों या जानकारों को चुनावी जंग में उतार देती है और अपनी चुनावी रणनीति बनाना शुरू कर देती है ।पर ये जो “भोली भाली जनता “ है , जो वोट करने वाली है , जिसके लिए चुनाव हो रहे हैं उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं होता । वह तो आराम से सो रही होती है । जिस दिन चुनाव होगा , उस वक़्त जाकर ठप्पा लगाना है , फिर कोई भी जीते या हारे हमें कोई फ़र्क नहीं पड़ता । दो चार दिन चर्चा करेंगे और सब भूल जाएंगे । राज तो उम्मीदवार के रिश्तेदारों को ही करना है । जनता बेचारी क्याें उस पचड़े में पड़े । वोट दो और काम ख़त्म करो ।

वाह री जनता !

जागो , मेरी प्यारी जनता , जागो !

जैसे ही चुनावी बिगुल बजता है , अब आप भी जागो , अपने अंदर झाँको और देखो कौन आपका सच्चा सहायक है। जैसे पार्टियां तैयारी में जुट जाती है वैसे आप भी जुट जाइये और देखिए आप में से ही कोई ऐसा व्यक्ति जो वाकई इसके क़ाबिल हो , पढ़ा लिखा हो, आपका दुख दर्द समझता हो , ऐसे इंसान की खोज करने में जुट जाइये , जो आपका भविष्य उज्जवल कर सकता है । पार्टियों से आपको कोई लेना देना नहीं है । पार्टियाँ अपना स्वयं का भविष्य देखती है और आपको अपना भविष्य देखना है। ढूंढने से तो भगवान भी मिल जाता है , फिर ऐसा इंसान ढूंढना कोई बड़ी बात नहीं है , ऐसे लोगों की दुनिया में कोई कमी नहीं है जो नि: स्वार्थ भाव से जनता की सेवा करना चाहते हो | क्याें उन्हें हम मौक़ा नहीं देते? क्यों उन्हें अपना नेता नहीं चुनते ? एक बार उन्हें हाथ पकड़कर सामने लाइए और फिर देखिए आपका विकास कैसे होता है । वोट आपका अधिकार है , उसका उपयोग किसी ऐरे गैरे के लिए मत कीजिए । आपके अधिकार को अपनी ताक़त बनाइए और अपना स्वयं का भविष्य उज्जवल करने की स्वयं कोशिश कीजिए । आँख बंद करके तमाशा देखने से अच्छा है स्वयं सक्रिय होकर अपना नेता स्वयं ढूंढें और अपना स्वयं का विकास स्वयं करें । कोई दूसरा आकर आपकी मदद नहीं करेगा यह हमेशा ध्यान रहे । स्वयं को स्वयं की मदद करनी ही पड़ेगी तभी आप सशक्त बनोगे वरना “ भोली भाली जनता “ का तमग़ा आप पर हमेशा चस्पा रहेगा और कोई भी ऐरा गैरा आपको बेवक़ूफ़ बनाकर आप पर राज करेगा ।

चुनावी बिगुल बज चुका है ।जनता अब जाग जाइए । अपना भविष्य अपने हाथों से लिखीए।

जागो ,जनता जागो!

डॉक्टर मंजू राठी

MBBS MD

LLB LLM

कोरोना काल में अपने आप को कैसे बचाएँ।

कोरोना काल में अपने आप को कैसे बचाएँ।

जीवन अनमोल है उसे व्यर्थ न गँवाएँ।

जीवन जीने के कुछ मंत्र

अभी कोरोना काल चल रहा है ।लॉक डाउन से सभी लोग परेशान हो चुके हैं ।और लोगों का काम धंदा भी इसकी वजह से नहीं चल रहा है ।लोगों में आमदनी को लेकर काफ़ी परेशानियां है। कई लोगों को घर चलाना मुश्किल हो रहा है । तो कई लोग घर में रह कर परेशान हो चुके हैं। बुजुर्ग बाहर नहीं निकल रहे हैं। ऐसे में स्वाभाविक है की कई लोग अपना मानसिक संतुलन खो रहे हैं। कई लोग डिप्रेशन में जा रहे हैं ।कई लोग सामाजिक दूरी रहने की वजह से अपने आपको इस नए माहौल में एडजस्ट नहीं कर पा रहे हैं ।इसलिए, उनका मानसिक तनाव कैसे दूर हो और तंदुरुस्त कैसे रहें ।अपनी जीवनशैली को कैसे बदलें ? जीवन कैसे जैसे जिये और ख़ुश कैसे रहें ?तंदुरुस्त कैसे रहें ? इसके लिए कुछ इम्पोर्टेंट बातें मैं आपको आज बताने जा रही हूँ ।

मनुष्य जीवन सिर्फ़ एक बार ही मिलता है ऐसा सभी कहते हैं ।मनुष्य जन्म तो बार बार लेता है पर मनुष्य योनी में सिर्फ़ एक बार ही आता है ऐसा अपने शास्त्रों में लिखा है। अगर ये जीवन सिर्फ़ एक बार ही है तो क्यों उसे कोरोना की भेंट चढ़ाएँ । क्यों न उसे बड़े ठाठ से ,शान से ,इज़्ज़त से , अपनी मर्ज़ी से और अपनी अच्छी सेहत के साथ जिया जाएँ।

अगर मनुष्य स्वस्थ और तंदुरुस्त रहेगा तो उसका यह जीवन सफल और सुंदर होगा । हर एक मनुष्य को ऐसा लगता है कि वह हमेशा सुखी रहे , तन, मन और धन से । अगर वह सुखी रहेगा तो उसका मन आनंदित रहेगा और मन ख़ुश रहेगा तो वह हमेशा स्वयं को ऊर्जावान पाएगा ।और जब वह स्वयं ऊर्जावान. स्फूर्तिवान रहेगा तो उसकी काम करने की क्षमता बढ़ेगी और अगर ऐसा होता है तो उसे ज़िंदगी में कभी कोई कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसका सार यही है कि मनुष्य को हमेशा स्वस्थ और आनंदित रहना चाहिए ।कहते हैं ना , “ सेहत ही सबसे बड़ी संपत्ति है “ ।सच है ,शत प्रतिशत सच है ।और इसी सेहत का राज मैं आपको बताऊँगी। आज हम समझेंगे कुछ नुश्कें अपनी सेहत तंदुरुस्त रखने के । हर मनुष्य के पास दिन के २४ घंटे होते हैं ।उसमें से कुछ वक़्त वह अपने आप के लिए निकालें ।वह थोड़ा सा वक़्त जो अपने आप के लिए निकालता है वही उसकी सेहत का राज है ।उस कुछ वक़्त में वह जो भी करें , अपनी सेहत के लिए करें यानी वे कुछ पल उसकी सेहत के लिए एक उच्च कोटि की दवाई है। तो आइए , जानते हैं उन कुछ पलों में हमें क्या करना है जो हमें सेहतमंद , ऊर्जावान और स्फूर्तिवान रखें और कोरोना से बचाएं।

१.सुबह उठते ही दो ग्लास गुनगुना पानी पियें। नींबू -पानी या नींबू -पानी और शायद भी ले सकते हो।

२.सुबह उठते ही एक घंटा अपने फ़ोन या मोबाइल से दूर रहें ।इससे आप अपने आपको वक़्त दे पाएंगे । आपका वक़्त बरबाद नहीं होगा और आप अपनी सेहत के लिए कुछ पल निकाल पाएंगे।

३.40 मिनट की कसरत करनी है चाहे तो आप टहल सकते हैं ,जॉगिंग कर सकते हैं ,तेज दौड़ सकते हो ,साइकिल चला सकते हो , एरोबिक्स या डान्स भी कर सकते हो ।सुबह की ताज़ा हवा में कुछ मिनट की कसरत करना आपके दिल और दिमाग़ के लिए अच्छा हेल्थ टॉनिक है ।सुबह की हवा में प्रदूषण रहित ऑक्सीजन होती है , वह आपके दिल और दिमाग़ के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद होती है ।और कोरोना काल में तो वो और भी फ़ायदेमंद है।आप योग भी कर सकते हैं ।अलग अलग तरह के आसन और प्राणायाम भी आपके लिए वही काम करेंगे जो कसरत करेगी।

अब हम जानेंगे 10 ऐसी बातें जो हमारी सेहत के लिए फ़ायदेमंद है।

“जीवनशैली में बदलाव “ यह सबसे बड़ा मूल मंत्र है परंतु अपनी जीवनशैली में बहुत बड़े बदलाव करने की बजाए अगर हम छोटे छोटे बदलाव करेंगे तो वे हम आसानी से अपना पाएंगे और हमें यह भी नहीं लगेगा कि हम अपनी जीवनशैली पूरी तरह से बदल रहे हैं ।हमें यह मंत्र बोझ नहीं लगेगा ।इन छोटे छोटे बदलाव से भी आप अपने आप को स्वस्थ और तंदुरुस्त रख सकते हैं और आपकी दिनचर्या पर भी इसका कोई विपरीत परिणाम नहीं होगा।

“10 मूल मंत्र”

1. अपने आप को ख़ुश रखें।

हमेशा ये कोशिश कीजिए कि आप स्वयं को हमेशा ख़ुश रखें ।तनाव से दूर रहें ।अपने आस पास ऐसा वातावरण तैयार कीजिए जिससे आप ख़ुश रह सकें ।तनावग्रस्त ज़िंदगी आपके लिए अच्छी नहीं हैं ।आप अपना वक़्त अपने प्रिय लोगों के साथ ,अपने दोस्तों के साथ या आपको ख़ुशी मिलती है वहाँ कुछ वक़्त बिताइए ।ऐसे दोस्तों से दूरी बनाएं जो आपको दारू पिलाते हो या स्मोकिंग के लिए उकसाते हो या फिर ज़्यादा खाना खाने के लिए मजबूर करते हो ।ऐसे लोगों से बचिए जो आपकी सेहत का ख्याल नहीं रखते हो ।ऐसे लोगों से दोस्ती बढ़ायें जो आपकी सेहत का ख्याल रखते हो ,आपके साथ कसरत करते हो , व्यसनों से कोसों दूर रहते हो ।अपनी संगत बदलिए शायद आपकी सेहत सुधर जाएं। कहते हैं ना , “ बुरी संगत का असर बुरा होता है “ ।बिलकुल सच है ,बुरी संगत से दूर रखिए और अच्छे दोस्त बनाइए ।ख़ूब ख़ुश रहीये और स्वस्थ रहीये।

2. अपना रोल मॉडल चुनिये।

हर इंसान का कोई न कोई रोल मॉडल होता है ।अक्सर हम उसके जैसा बनना चाहते हैं । कोई बात नहीं , अगर उसमें और आप में कोई मेल न हो ।पर अगर आप उसके जैसा बनने की कोशिश करेंगे तो भी आप अपने आपको फ़िट और तंदुरुस्त रख पाएंगे ।आपका रोल मॉडल हमेशा आपमें

पॉज़िटिव सोच एवं एनर्जी पैदा करेगा ।अपने रोल मॉडल की जैसे बनने की कोशिश करने में आप अपने आपको फ़िट और तंदुरुस्त रख सकते हैं ।

हमारा रोल मॉडल ऐसा होना चाहिए जो हमें स्फूर्ति दें। अपने आपको फ़िट रखने के लिए प्रेरित करें ,तंदुरुस्त रहने के लिए प्रोत्साहित करें । रोल मॉडल वो कोई भी इंसान हो सकता है जो हमें बुरे विचारों से दूर रखें और अच्छे विचारों का मन में संचार करें ।कभी कभी अपने रोल मॉडल में भी कुछ एेब हो सकते हैं ,आप उनसे बचने की कोशिश कीजिए ना कि उन्हें अपनाने में अपनी शान समझिए।

3. आपको खाना कंट्रोल में खाना चाहिए

ज़्यादा खाना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है । उतना ही खाना चाहिए जितनी हमें भूख हो ।जो हमें ज़बरदस्ती ज़्यादा खिलाने के लिए मजबूर करते हो उन्हें साफ़ मना कर दें ,या फिर उनसे दूरी बनाए रखें ।जिन्हें आपकी सेहत का ख्याल नहीं ,ऐसे दोस्तों से दूर रहे ।खाने में हमेशा हेल्दी फ़ूड का इस्तेमाल करें ।वज़न बढ़ाने वाली चीज़ें ,जंक फुड़ ,कोल्ड्रिंक से दूरी रखें ।अपने किचन में ऐसी चीज़ें भरपूर मात्रा में रखें जिनमें कैलरी कम हो ।खाने का और अपने मूड का सीधा कनेक्शन है ।अगर हम बोर हो रहे हो या फिर हमारा मूड ख़राब है ,तो अक्सर हमारी खाने की इच्छा होती है और उस वक़्त भूख न होने पर भी हम कुछ न कुछ खाते रहते हैं और हमारा वज़न बढ़ता जाता है ।ऐसे में हमें हमारे फ्रिज में ऐसी चीज़ें हों जिनमें कम कैलरी हो ,यानी फ्रूट्स ,वेजिटेबल और बिना शक्कर के फ्लेवर्ड ड्रिंक्स इत्यादि। कम कैलरी बिस्किट्स ,चने ,रोस्टेड चीज़ें नियमित मात्रा में लें सकते हैं।

4. अपनी जीवनशैली में बदलाव करें।

ज़रूरी नहीं कि हेल्दी रहने के लिए ऐसे बदलाव करें जिन्हें करने में आपको काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता हो। ऐसे बदलाव आप या तो बिलकुल नहीं कर पाते या फिर कठिनाईयों की वजह से उन्हें छोड़ देते हैं । ऐसे संपूर्ण बदलाव की आपको ज़रूरत नहीं है । वज़न कम करने के लिए और हेल्दी रहने के लिए कुछ छोटे छोटे बदलाव ही काफ़ी फ़ायदा पहुँचा सकते हैं । जैसे की ,

1. खाने से पहले 1 गिलास पानी पीएँ ।

2. पानी की मात्रा 3 -4 लीटर तक बढ़ा दें ।

3. सुबह सिर्फ़ 15 मिनट जल्दी उठें।

4. अपना कसरत का वक़्त या घूमने का वक़्त 10 मिनट और बढ़ा दें ।

5. खाने में मीठा या जंक फ़ूड कम कर दे ।

6. हरी सब्ज़ियां या सलाद की मात्रा थोड़ी सी बढ़ा दें ।

7. काम करते वक़्त थोड़ा सा ब्रेक लें और टहले ।

8. कुछ कुछ हाथ पाँव की कसरत करें ,उन्हें हिलाते रहे ।

9. एक जगह पर ज़्यादा देर तक बैठे ना रहे ।

10. बीच बीच में पानी पीते रहें।

5. अपने आपको हमेशा ख़ुशनुमा माहौल में रखने की कोशिश करें।

अपने आस पास का वातावरण इस तरह बनाएँ कि आप अपने आपको आनंदित रख सके ।आप अपने आप को ख़ुशनुमा अपने परिवार के साथ ,अपने दोस्त के साथ ,अपने बिज़नेस पार्टनर के साथ ,अपने ऑनलाइन दोस्त के साथ , अपने वर्क प्लेस के दोस्त के साथ वक़्त गुज़ार कर रख सकते हैं।आप अपने आप को हमेशा ऐसे लोगों के साथ रखें जो आपका टेंशन कम करें ,आपको ख़ूब हँसाएँ,ना कि आपका टेंशन बढ़ाएं।जो ऐसा करते हैं उनसे दूर रहना ही फ़ायदेमंद होता है। अपने ऐसे चार पाँच दोस्त बनाएँ जिनके साथ आप अपनी हेल्थ प्रोब्लेम्स ,घरेलू प्रॉब्लम्स ,पर्सनल प्रॉब्लम्स साझा कर सके ।जो आपकी बात अपने तक ही सीमित रखें और आपको मेंटल सपोर्ट करे ,ना कि आपका मज़ाक बनाएँ ।जो दोस्त मज़ाक बनाते हैं उनसे जल्द ही दूरी बनाना ठीक होता है। ऐसे दोस्त बनाएँ जो आपको आपकी हेल्थ के प्रति हमेशा सजग रहने के लिए प्रेरित करते रहें ।आप अगर अपनी हेल्थ पर ध्यान देना शुरू करते हैं और आप स्वस्थ रहने में क़ामयाब हो जाए तो वे आपको प्रोत्साहित करे, ताकि आपका उत्साह दोगुना बढ़ जाए ।ऐसे में आपको भी अपनी ख़ुशी उनके साथ सेलिब्रेट करनी चाहिए ताकि आपकी ख़ुशी और बढ़ जाए ।यही तो एक चक्र होता है जो अगर सतत चलता रहे तो आप कभी डिप्रेशन के शिकार नहीं होंगे।

6. अपने आपको माफ़ करना सीखें।

कभी कभी आपछुट्टियां मनाने चले जाते हैं ,या अपनी रोज़मर्रा की दिनचर्या से छुट्टी ले लेते हैं ।जैसे कसरत करना छोड़ देते हैं ,घूमना छोड़ देते हैं ,कभी ज़्यादा खा लेते हैं ,कभी ज़्यादा पी लेते हैं या फिर मिठाई ,आइसक्रीम ख़ूब खा लेते हैं ,तो अपने आप को दोष न दें ।उस पल को भी इंजॉय करें ज़िंदगी अपने रोज़मर्रा के रुटीन से हटकर जीना भी अपने आप में एक ख़ूबसूरत एहसास होता है ।छुट्टी वाले दिन देर तक सोना है ,आलस भरे अंदाज़ में, कुछ वर्कआउट न करना ।कोई बात नहीं ! उन पलों को भी जीना सीखो ।अपने आप में जीना सीखो ।ज़रूरी नहीं की मशीन लाइफ ही जियें ।इससे भी अलग हटकर एक ज़िंदगी है उसे भी जीना चाहिए।उसका भी एहसास करे ।आज आप रुटीन से हटकर कुछ कर रहे हैं तो अपने आप को गुनेहगार ना बनाएँ ।हमेशा पॉज़िटिव सोच रखें ।”आज आपने ज़िंदगी जी है और कल से आप ज़िंदगी के लिए जियेंगें “ ये सोच रखें और अपने रोज़मर्रा के रुटीन मे जैसे ही आए ,अपना वक़्त अपनी हेल्थ के लिए दे ।क्या हुआ आज हमने कुछ हटकर किया तो ?पर यह ज़्यादा दिनों तक ना रहे और जैसे ही छुट्टियाँ भी तो जाएं अपने आप पर फिर अपना ध्यान केंद्रित करें ताकि आप स्वस्थ रह सके ।आलस न करें ।जो वक़्त आप आलस्य में बिता चुके ,अब दुगुने उत्साह से अपने फ़िटनेस में लग जाए ।यही है ज़िंदगी !

7. भूखा ना रहे ।

आपको अपने खाने के समय का ध्यान रखना चाहिए । आपको ज़्यादा वक़्त तक भूखा नहीं रहना चाहिए।अगर आप ज़्यादा देर तक भूखा रहेंगे तो जब भी आप खाना खाने बैठेंगे तो यह स्वाभाविक है कि ज़्यादा खाना खाएँगे, यानी ओवरइटिंग हो जाएगी और आपका वज़न बढेगा। ऐसे में इसे रोकने के लिए आपको संतुलित आहार वक़्त वक़्त पे लेना चाहिए ।जब भी आपको भूख लगे ,थोड़ी मात्रा में खाते रहना चाहिए ताकि आपकी एक साथ खाने की तमन्ना कम हो जाएं और ज़्यादा खाने से भी बचा जा सके ।हफ़्ते में एक बार पार्टी कीजिए पर खाना संतुलित हो ।किसी पार्टी में जाने से पहले कुछ खा लें ताकि आपका पेट भरा होने से पार्टी में आप कम खाएंगे और अपना वज़न और हेल्थ अच्छी रख पाएंगे ।अगर आप भूखे रहेंगे तो खाने में ज़्यादा आएगा जो कि आपके शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

8. हमेशा ध्यान रहे -बदलाव वक़्त माँगता है।

अगर आप अपने शरीर में बदलाव की आशा करते हैं तो हमेशा ध्यान में रहे की बदलाव वक़्त माँगता है ।बदलाव आने में वक़्त लगता है ।ऐसा नहीं कि आज हमने अपनी लाइफ़ स्टाइल बदली और कल ही बदलाव आ जाएगा । यह चुटकियों का खेल नहीं है।बदलाव के लिए वक़्त ज़रूरी होता है ।आपको अपनी लाइफ़स्टाइल में बदलाव निरंतर करते रहना चाहिए ताकि भविष्य में इसका असर देख सकें ।कोई आदमी स्वस्थ है ,पतला है ,तंदुरुस्त है तो उसे देखकर दुखी न हो पर अपनी मेहनत जारी रखे, आपको रिज़ल्ट ज़रूर मिलेगा।बदलाव लाने का वक़्त हर इंसान के लिए भले ही अलग अलग होता हो पर अगर आप मेहनत करेंगे तो उसका असर आपके शरीर पर ज़रूर दिखेगा ।इसी लिए आपको वक़्त रहते संभालना भी चाहिए और वक़्त देकर बदलाव आने का इंतज़ार करना चाहिए ।ऐसा नहीं हो, कुछ बदलाव न देखकर आप मायूस हो जाएँ और अपनी मेहनत करना छोड़ दें ।नहीं! ऐसा बिलकुल नहीं करना है ।”सब्र का फल हमेशा मीठा होता है !” वक़्त दीजिए और फिर देखिए अपने आप में बदलाव। शत प्रतिशत गारंटी है उस बदलाव को देख कर आपकी मुस्कुराहट ज़रूर बढ़ेगी।

9. हमेशा कुछ न कुछ करते रहिए- कुछ एक्टिविटी करते रहे।

काम की वजह से या किसी और चीज़ के लिए लंबे अरसे तक बैठे रहना ,आपकी सेहत के लिए अच्छा नहीं है। हमेशा कुछ न कुछ एक्टिविटी करते रहना चाहिए। वर्क प्लेस पर आप काफ़ी देर तक बैठे रहते हो तो ऐसे में आपको बीच बीच में उठकर कुछ क़दम चलना चाहिए । लंबे वक़्त तक TV देखना अच्छा नहीं होता है ,ऐसे में रिमोट से चैनल बदलने की बजाय उठकर TV के पास जाकर चैनल बदलें ताकि कुछ क़दम ताल हो जाए ।अगर लिफ़्ट है तो उससे जाने की बजाय एकाद फ़्लोर सीढ़ियां चढ़कर जाए ताकि आप कुछ हिल डुल सके ।अगर कुछ ख़रीदारी करने जा रहे है तो गाड़ी थोड़ी दूर पार्क करें और कुछ क़दम पैदल चले।

कुर्सी पर बैठे बैठे अपने पाँव हिलाते रहिए ,या हाथ हिलाते रहिए ,कुछ पल के लिए अपने हाथों की और गर्दन की कसरत करनी चाहिए। घर पे हो तो बच्चों के साथ मस्ती कर लीजिए ।इन सभी चीज़ों में आपकी कैलरी बर्न होगी और आप की मांसपेशियों में जकड़न पैदा नहीं होगी और सबसे ज़रूरी बात आप मोटापे से बच पाएंगे।

यह ध्यान रहे कि ,सतत चलने वाला इंसान बैठे रहने वालों की तुलना में कम मोटा होता है और तंदुरुस्त भी रहता है ।इसलिए कम बैठो और कोशिश करे कि अपने आपको सतत एक्टिव रखें।

10. रोज़मर्रा की ज़िंदगी को हमेशा एक त्योहार की तरह मनाओ।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में रोज़ का वर्कआउट , कसरत और तंदुरुस्त होने की चाहत और वज़न कम करने के चक्कर में कहीं आप अपनी ज़िंदगी को नज़रअंदाज़ तो नहीं कर रहे हैं? हर पल महत्वपूर्ण है । आपको चाहिए उसे व्यर्थ न जाने दें । ऐसा नहीं हो की फ़िटनेस मंत्र के चक्कर में अपने आप को भूल जाए ।हर वो पल क़ीमती है जिसे आपको जीना है ।ज़िंदगी की छोटी छोटी खुशियों को नज़र नज़रअंदाज़ न करें। खुशियां आएंगी और आप उन्हें मनाएंगे इस सोच को त्यागना हैं और हर एक पल में खुशियाँ ढूंढें और उसे एक त्योहार की जैसे मनाएँ। ख़ुशी के मायने हर आदमी के लिए अलग अलग होते है। आपको उसी ख़ुशी के साथ जीना है , उसी ख़ुशी को आगे बढ़ाना है । आप इसी सोच के साथ जीएंगे और हर एक नया दिन खुशियों से भरपूर हो ऐसा करने की सोचेंगे।

ज़िंदगी का सफ़र तय करने का सोचने से पहले हर दिन का सफ़र तय करना है ।वह भी ख़ुशी और उल्लास के साथ ।जिए तो क्या जिए ,अगर ज़िंदगी में कोई परेशानी न हो।आज कोरोना बहुत बड़ी परेशानी है ।पर इस कोरोना महामारी वाली परेशानी पर आप सभी को विजय हासिल करनी है और हमेंशा मुस्कुराते रहना है। इस कोरोना काल मैं आप सभी को स्वस्थ और सुरक्षित रहना है और डिप्रेशन से कोसों दूर रहना है और इन सभी को हासिल करने के लिए आपको ऊपर दिये हुए ये 10 सूत्री मंत्र को अपनाना है।

स्वस्थ रहें ,सुरक्षित रहे।

डॉक्टर मंजु राठी

एम बी बी एस./एम.डी

एल एल बी / एल एल एम

जनता का अधिकार।

जनता का अधिकार।
जागो .जनता जागो ।
आज रविवार था । सुबह -सुबह चाय की चुस्कियों के साथ अख़बार पढ़ रही थी, तभी एक ख़बर पर नज़र पड़ी ।दो दिन पहले तबादला होकर आए ऑफ़िसर सरकारी अस्पताल का मौक़ा मुआयना करने गए । वहाँ की अव्यवस्थाओं को देखकर चिकित्सकों पर नाराज़ हुए और उन्हें सख़्त दिशा निर्देश देकर आए ।
वाह! क्या बात है !
कितने अच्छे ऑफ़िसर आए हैं ! आते ही जनता की सुध लेने निकल पड़े ।जनता ने ऐसा ही सोचा , क्योंकि हमारी सोच यही तक ही है । कुछ लोग हार – माला पहनाने चले गए ।पर क्या , जनता कभी यह समझ पाई हो कि यह वाक़ई कोई ज़रूरी इंस्पेक्शन था ? क्या उन ऑफ़िसर को शहर में आते वक़्त वो अस्पताल दिखा था जहाँ पर उन्हें बाहर से ही अव्यवस्थाएं नज़र आयी हो ? क्या शहर में आते वक़्त उन्हें यहाँ की सड़कें नहीं दिखी ? जिस पर उनकी गाड़ी चल कर आयी। क्या उनकी पीठ में दर्द नहीं हुआ ? क्या उनके ड्राइवर ने किसी मोटरसाइकिल से बचने के लिए कभी झटके से ब्रेक नहीं मारे? क्या उन्हें यहाँ की बेतरतीब ट्रैफ़िक व्यवस्था नहीं दिखी? आडे – टेढ़े पार्क किए हुए वाहन नहीं दिखाई दीये ? शहर में हर जगह होर्डिंग लगे नहीं दिखे , जिसमें से आधे तो ऐसे थे जो हवा के एक झोंके से गिरकर कोई एक्सीडेंट नहीं करते? सड़क पर गहरे गड्ढों में जमा गंदा पानी , कचरे से भरी नालियां , उनका सड़क पर बहता पानी , बदबूदार हवा , जहाँ से गुज़रते वक़्त मुँह और नाक पर रूमाल रखना पड़े । सभी तरफ़ गंदगी ,कचरा , प्लास्टिक की थैलियां , रोड पर आधे से ज़्यादा अतिक्रमण किये हुए ऑटो वाले और सब्ज़ी वाले और ठेले वाले, सड़क पर बेखौफ घूमने वाले जानवर ,गाय ,कुत्ते इत्यादी । आपने ये कुछ नहीं देखा ! देखा तो सिर्फ़ अस्पताल जहाँ पर इससे बेहतर साफ़ – सफ़ाई और अन्य व्यवस्थाएं है । वहाँ आपको अव्यवस्था लगी और बाक़ी सारे शहर में सारी व्यवस्थाएं ठीक है ? क्योंकि अस्पताल की व्यवस्थाएं एक चिकित्सक यानी कोई और देखता है , उसमें त्रुटि हो सकती है पर शहर की सारी व्यवस्था तो प्रशासन के हाथ में यानी कि आपके हाथ में है , उसमें भला त्रुटि कैसे हो सकती है ?
जागो ,जनता जागो ।
अच्छी स्वास्थ्य सेवाएँ ,शुद्ध पानी, शुद्ध हवा और सुखद वातावरण क्या जनता का अधिकार नहीं है ?
जागो और जागते रहो।

डॉक्टर मंजु राठी
एम बी बी एस./एम.डी
एल एल बी / एल एल एम

सोनोग्राफी मशीन को मुक्त करें

वाह ! क्या कहना !

जनता ,आप कब जागेगी?

कल ही TV पर देखा , दुबई में सबसे ऊँची इमारत बुर्ज ख़लीफ़ा पर एक जोड़े ने लाखों रुपया ख़र्च करके शानदार जश्न मनाया। जश्न का कारण था “ जोड़े के अजन्मे बच्चे के लिए लिंग का पता चलना “ । वाह ! क्या बात है !

अपने अजन्मे बच्चे का लिंग यानी लड़का है या लड़की है यह मालूम चलने पर उस जोड़े ने शानदार जश्न मनाया और सारी दुनिया ने उसे TV पर देखा। मन में बड़ी इच्छा हुई काश़ ! हम भी ऐसा कर पाते? आज विश्व में अनेक ऐसे देश हैं जहाँ गर्भ में ही लिंग पता करना क़ानूनन वैध है पर हमारे देश में ऐसा क्यों नहीं है ? क्यों?

सोचो ,जनता सोचो !

तो क्या इसके लिए वह सोनोग्राफी मशीन ज़िम्मेदार है जिसे हमने बेड़ियों में जकड़ कर रखा है। जिसे अपनी सेवा सब जगह पर देनी चाहिए ,चाहे वो ऑपरेशन थियेटर हो ,डिलीवरी रूम हो ,आइ सी यू हो ,या कोई वार्ड हो ,जहाँ वह सोनोग्राफी मशीन चलकर जा सके । जिससे मरीज़ को तुरंत उसके पास सुविधा उपलब्ध हो जाएं और न की मरीज़ को अपनी गंभीर स्थिति में सोनोग्राफी मशीन तक चलकर जाना पड़े ।उस गंभीर अवस्था में मरीज़ को सोनोग्राफी मशीन तक लेकर जाना मुश्किल होता है ,पर हम ये कब समझेंगे ? हमारी जनता कब समझेगी ?क्यों हमारे भारत में सोनाग्राफी मशीन को सिर्फ़ गर्भवती महिला के भ्रूण की लिंग जाँच के लिए ही उपयुक्त है ऐसा मानते हैं ? क्या उसके और कोई फ़ायदे नहीं है ?क्या जनता को यह फ़ायदे समझ में नहीं आते ?क्या लिंगानुपात के लिए यह ग़रीब सोनोग्राफी मशीन ही ज़िम्मेदार है ?क्या यह जनता ,यह देश , देश की व्यवस्था ,इस देश की सोच ,जनता की सोच ,उसकी परम्पराएँ ,यहाँ की स्वास्थ्य सेवाएँ ,इन लड़कियों को आगे बढ़ने से रोकना , न आगे न पढ़ने देने की इच्छा , पुरुष प्रधान संस्कृति, लड़कियों की सुरक्षा, क्या ऐसे अनेक कारण ज़िम्मेदार नहीं है ? आज हम पाश्चात्य शिक्षा प्रणाली अपना रहे हैं ,कई पाश्चात्य स्वास्थ्य सेवाएँ भी अपना रहे हैं ,अनेक पाश्चात मॉडल अपना रहे हैं ,डिजिटल इंडिया बना रहे हैं, तो क्या फिर हम इस सोनोग्राफी को बेड़ियों में जकड़ कर अपने स्वास्थ्य सेवाओं को पंगु नहीं बना रहे है ?सोचने वाली बात है? जनता आप ये कब समझेंगे ? कब तक इस आसान जाँच वाली मशीन को क़ैद करके रखेंगे ?

और डॉक्टर, क्या आप अपनी लड़ाई कोई ओर लडने का इंतज़ार करेंगे ?

सोचो और सोचो।

डॉक्टर मंजु राठी

एम बी बी एस./एम.डी

एल एल बी / एल एल एम

Why sonography machines don’t walk in India?

Why sonography machines don’t walk in India?

Why sonography machines don’t walk in India ?

Why they are jailed in one room?

why the most useful small portable machines banned?

THINK INDIA,THINK

Sonography use is unlimited and in developing country like India where resources are limited,we need small portable machines at bedside , in operation theatre, labour room,ICU etc for better diagnosis and treatment .But just because of it’s use for pregnant women,False thinking of sex determination by everyone ,it’s existence is banned and it became extinct. But ultimately who is the sufferer, THE POOR PATIENT. And health care profession becomes the victim as it is blamed for greedy practices alleging that usg is used for sex determination only and earning money through such practice .But really is it so?

Think India,Think?

The second part of story of USG machines:

USG machines are governed by PCPNDT ACT:

What are the proposed guidelines under this act:

1) In India,before doing usg on pregnant lady , her ID proof is necessary and many times this is not possible in emergency cases as lady in agony or with emergency may forget to carry ID and in such situations a doctor becomes helpless as he is bound by authorities not to do sonography without ID proof .

But, in act it is not written but according to guidelines ,it is mandatory.But as a fundamental right of woman ,doctors can’t deny her for Usg but doctors are helpless under Appropriate Authorities pressure . Is it not the violation of FR of woman?

What is important at this agony time?ID proof or USG test and quality treatment?

Think India,Think

2) submission of “F”form online along with offline mode by hand is compulsory here . so sending one person to cmho office away from town to district place every month just for this job is really worth and feasible to all?How much expensive it is? But health care providers are doing this under pressure.

By post or courier service why they won’t accept ?why?

Our PM transforming India to digital India and in such era we are wasting lots of tonnes paper on this useless offline submission of

“F” form job .That May create tons of garbage afterwards.

Shall we know the importance of trees? we are doing online f form filling then why same thing to be repeated and done twice? Giving information once is not enough?

I don’t understand the logic behind this.

Think India,Think.

3) Why this Pcpndt act governs all these Poor USG machines ?

Is USG meant for sex determination of fetus only?and not for other indications.Is it true?

What you all Think?

Data shows no much change in sex ratio.Then why these most useful small Usg machines banned?

And why sonography machines don’t walk in India?,

There are so many reasons for low %of females in India like poor care,predominant male community,customs,poor health care services,neglected female child or neglected women health ,dowry system,less representation of women in all sectors,lack of opportunities for higher education to all,shortages of jobs for female candidates.safety grounds and so on and so forth.But adnimistrators are blaming the poor usg. Usg is meant for many purposes and sticking it in one room by GPRS and tracker , are we not limiting it’s use in modern medicine?

Do you know how the doctors precious time is wasted on such paper work and on unnecessary activities besides treating patients who are doing this unnecessary clerical work under this act.

Think India,Think.

Our Hon’ble PM and concerned authorities please have a small attention on this issue ,

“ why sonography machines don’t walk in India?”Why they are jailed?

Dr Manju Rathi

MBBS MD

LLB LLM

JAGO Janta Jago

🌹गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏क्या खोया! क्या पाया!

जनता से विनम्र अपील ——-

आज न्यूज़ पेपर में पढ़ा कि नगर परिषद का कार्यकाल समाप्त हो गया ।मन में विचार आया ——- क्या जनता के लिए यह कार्यकाल कभी शुरू भी हुआ था? हर 5 साल में जनता एक नई किरण , नई उमंग , नई आशा से एक टीम चुनकर अपने मन में संजोये सपने को साकार करने के लिए प्रेषित करती है ।क्या वाक़ई वो टीम उनकी उम्मीदों पर खरा उतरती है?

आज हमारे शहर में हम शहरवासी बड़े शान से रहते हैं ,और कहते हैं , हम मार्बल नगरी में रहते हैं जहाँ बड़े बड़े उद्योगपति रहते हैं ,जहाँ एयरपोर्ट है ,बस स्टैंड है ,रेलवे स्टेशन है ,कॉलेज है ,स्कूल है ,सब कुछ तो है यहाँ !नहीं है तो सिर्फ़ सडक नहीं है ,पानी नहीं है ,पार्किंग नहीं है ,शहरवासियों के लिए घूमने की जगह नहीं है , सफ़ाई नहीं है ,मूलभूत सुविधाएँ नहीं है ।थोड़ी सी हवा के झोंके से घंटों बिजली चली जाती है फिर भी बिजली बिल का मीटर ऊपर चढ़ता ही दिखता है ।कोई दूर देश से मेहमान घर आना चाहें तो हमें शर्म महसूस होती है यहाँ की सड़कें देखकर कि हम इस शहर के वासी हैं ।जहाँ सब जगह गड्ढे ही गड्ढे हैं ।कब तुम्हारा एक्सीडेंट हो जाए और तुम अकाल मौत के ग्रास बन जाओ या अपनी हड्डी पसली तुड़वाकर महीनों बिस्तर पर आ जाओ ।इसके लिए हम शिकायत किससे करेंगे ?सरकार से ! नहीं , कदापि नहीं ! हमें इसका हक़ नहीं है ।हमें तो एफ़ .आई .आर हमारे ऊपर ही करनी चाहिए क्योंकि इसके ज़िम्मेदार सरकारें नहीं हम स्वयं है ।हम लोगों ने ही तो उन पे किसी तरह का दबाव नहीं बनाया की हमारा काम हो जाए तो हम उन्हें दोष क्यों देंगे? किस बात से उन्हें दोषी ठहराएंगे? क्या हमने कभी उनसे पूछा ,हमारा काम क्यों नहीं हो रहा है ?हमारा शहर क्यों इतना मजबूर है ?क्या हमने कभी कोई सवाल उठाए ?क्या हमने कभी कोई स्ट्राइक की ?क्या हमने कभी कोई धरना दिया ? क्या हमने कुछ किया? मूकदर्शक होके बैठे हैं ।इंतज़ार कर रहे हैं ,की कोई जादू हो जाए और ये सब कुछ ठीक हो जाए।अरे, बिना रोये तो माँ भी अपने बच्चे को दूध नहीं पिलाती।

हम हमारे रिश्तेदारों से यह कहते हैं ,भाई, प्लीज़ यहाँ मत आना ,हम ही आ जाएंगे आपसे मिलने ।कैसे शर्म से हमारी गर्दन झुक जाती है ।पर क्या फ़र्क पड़ता है ?हम भोली भाली जनता है ।कोई भी हमें लॉलीपॉप देकर , बहला फुसलाकर उल्लू बना सकता है ।हर 5 साल में सरकारें बदलती है ,पर जब उनका लेखा जोखा करने बैठते हैं तो स्वयं को ठगा – सा महसूस करते हैं ।फिर भी मुझसे उफ़ तक नहीं निकलती है ?

क्या कोई माँ अपने बच्चों को कभी खोटा सिक्का कहती है क्या ?नहीं ना ! जनता भी तो माँ है ,तो वह अपने बच्चों की सभी बुराइयों पर पर्दा ही डालती आयी है ।पर कब तक माँ !कब तक ! आपको अपने आने वाले पीढ़ी के भविष्य की चिंता नहीं है ?आप अपने भविष्य को इसी तरह कब तक दाँव पर लगाती रहेगी ?जनता को अपनी चिंता करनी चाहिए ।किसी पार्टी पॉलिटिक्स के चक्कर में अपने सपने , अपना भविष्य , अपने बच्चों का भविष्य दाँव पर लगाना उचित होगा ? कोई पार्टी ख़राब नहीं होती ।सभी अच्छी होती है ।पर जनता को इन सब से ऊपर उठकर अपने विकास का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।रेंगती हुई, बैलगाड़ी -सा काम करना दिखाकर क्या सरकारें भोली भाली जनता के साथ छलावा नहीं कर रही ? महीनों में होने वाले काम बरसों तक चलते रहते हैं। सरकारें बदल जाती है ।पिछली सरकार का काम हम क्यों करें? और वह काम फिर लंबित हो जाता है ,और जनता वोटों की राजनीति में फँसकर इस चक्रव्यूह से अपने आप को कभी आज़ादी ही नहीं करवा पाती ।इस झंझावात से बाहर निकल कर दुनिया की तरफ़ दृष्टि उठाकर देखिए तो पता चलेगा हम कहाँ खड़े हैं ? क्या हम किसी किनारे पर बैठे बैठे लोटे से नहाते रहेंगे ?कभी सागर में डुबकी लगाकरएक वीर पुरुष की तरह बाहर नहीं आएँगे ?अब समय आ गया है जनता को अपना यह “भोली भाली “जनता का चोला उतारकर फेंकने का।इस राजनीति से ऊपर उठकर अपने बारे में ,अपने विकास के बारे में ,शान से गर्दन उठाकर चलने के बारे में सोचना होगा ।गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर भगवान श्री गणेशजी से यही प्रार्थना है कि इस सब भोली भाली जनता को सद्बुद्धि, सदविवेक और सदाचार से कर्तव्य निभाने का साहस दे ।

डॉ. मंजू राठी

M B B S .MD

LLB LLM

Consumer protection act 2019—-Doctors In Dilemma

CONSUMER PROTECTION ACT,2019

“DOCTORS IN DILEMMA

WHY?

Because doctors are confused on the question——-

“Is healthcare services are in the ambit of consumer protection act ,2019?”

Before analysing this question ,we all should know the history of CPA.

1. CPA,1986 was enacted on 24th December,1986 and enforced on 15th April,1987.

2.Many amendments were done in CPA in years 1991,1993,2002 etc.

3.Now the CPA 1986 is repealed and replaced by new CPA act-2019

4. CPA 2019, was notified in Gazette on 9 August 2019

5. CPA-Rules—2020 are notified in Gazette on 15 July 2020.

6. CPA rules were declared to be implemented from 20 July 2020

Now,Coming to the question

Is healthcare services are in the ambit of CPA 2019 ?

There are two schools of thoughts .

First says “YES “

The healthcare services fall in the consumer protection act 2019.and this New act is more stringent than the old one.

REASONS TO SUPPORT THIS THOUGHT :

1.”Healthcare “word is not there in CPA,1986

2. But healthcare came in the ambit of consumer protection act after the judgement of Hon ‘ble Supreme Court by three judges bench on the case “IMA versus V P Shantha 1995”

In which the “service“ is interpreted in such a way that Medical profession was brought within the ambit of consumer protection act 1986 .The medical services provided with consideration is included in it. The court said even though services rendered by medical practitioners are of personal nature ,they cannot be treated as contract of personal service (which are excluded from the consumer protection act They are contract for service under which a doctor too can be sued in consumer protection courts.

And henceforth ,the patient became the consumer and the doctor treated as a service provider and Doctors are sued in the consumer courts .

THUS, IN SAME WAY ,

the “healthcare “ word is also not in this new act but there is no change in the clause of service and many other clause are also added in this new act which indirectly include medical profession in the CPA 2019 and judiciary may interpret this act in the same way as interpreted in 1995 IMA versus V P Shantha case and there is no relief till the decision of IMA versus V P Shantha is overruled by Supreme Court larger bench ,till then the doctors may be governed by this new act which is more stringent than the old CPA.

Now ,the second school of thought .Which says ,

NO

The “healthcare “is not included in CPA,2019.

The reason behind this thought is:

1) Constitution of India is supreme law of our country There are separation of powers as per our Constitution where

LEGISLATORS enact the acts

EXECUTIVE implement the rules and

JUDICIARY interpret these acts

The powers are separated in these three pillars .

Consumer protection act 2019 is an act of Parliament of India .It repeals and replaces the consumer protection act 1986.

As this is the new act and not amendments,so it should be interpreted in a fresh way by the judiciary by examining the intention of parliament behind enacting this new act.

2)The consumer protection Bill 2019 was introduced in the LokSabha on 8 th July 2019 by the Minster of Consumer Affairs, Food and Public Distribution ,Mr Ram Vilas Paswan .It was passed by Lok Sabha on 30th July 2019 with high controversy on the issue of inclusion of healthcare . The word healthcare was there in section 2(42) of the CPA bill 2018 which was passed in LOK SABHA after the word telecom.

After that ,the bill which was passed in Rajya Sabha on 6th August 2019, do not contain the word healthcare in section 2(42).

The reason stated by Minister Mr .Ram Vilas Paswan about removing healthcare is that many members of parliament do not want healthcare in this Bill. Reason behind this is that if the doctors are included in CPA then they become more defensive due to fear of CPA and he quoted the example of Headache and cough.

If patient goes to doctor for simple complaint and due to fear of CPA, doctor may advice many investigations before prescribing a simple painkiller and the treatment gets delayed and costly also, so the healthcare is struck off from the new Bill.

And the bill received assent from President Ram Nath Kovind on 9 th August 2019 and notified in Gazette of India on the same date.

This Proves that the intention of parliament is to keep healthcare professionals out of the ambit of CPA.

3) Many leading consumer rights bodies who are dealing with interests of consumer are worried after removal of word healthcare from the Bill and they are opposing it ,this also support that healthcare is out of CPA 2019.

To conclude this Analysis

I wish to say,”UNITY OF DOCTORS “is today’s need to stay out of CPA as FATE OF DOCTORS is in the hands of MY LORD , how they interpret this new act as LEGISLATORS showed their clear intention and now it is the work of judiciary to interpret it constitutionally.

My Lord , “SAVE THE DOCTORS”.

Dr. Manju Rathi

MBBS MD (Gold medallist)

LLB LLM (Gold medallist)