❤️ मुझे तो जीना है।।❤️
आजकल छात्रों-बच्चों में आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिनके आंकड़े डराने वाले हैं। माता-पिता द्वारा बच्चों पर पढ़ाई का दबाव , बच्चों की स्वयं की आशाएं, प्रेम प्रसंग, अकेलापन, व्यसन, पारिवारिक समस्याएं और पढ़ाई को लेकर दबाव, यह सभी चीजे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालती हैं। कई बार बच्चे मेंटली इस तरह निराश और परेशान हो जाते हैं कि उनके दिमाग में आत्मघाती विचार आते हैं और ऐसे में उन्हें आत्महत्या ही इकलौता विकल्प दिखाई देता है।
इस कविता के मार्फत कवियत्री यह कहना चाहती है कि जिंदगी में परेशानियां हमेशा आती है ,लेकिन थोड़ा सा रुक के, संभल के, समझ के और इन परेशानियों को किसी के साथ साझा करने से इसका हल भी बहुत आसानी से निकल जाता है और जिंदगी जीने की प्रेरणा मिलती है। जीवन का अंत किसी भी परेशानी का समाधान नहीं है।
यह बहुत ही मार्मिक और सभी बच्चों को मोटिवेशन देने वाली कविता है।
❤️ मुझे तो जीना है।।❤️
क्यों करूं मैं अपने जीवन की हत्या।
क्यों करूं मैं आत्महत्या ।।
माना की तनाव है मुझ पर,
पढ़ाई का बोझ है
खाना पीना सोना हराम है
मां बाप का सपना है
जिंदगी में कुछ बनना है।
गर नहीं कर पाया यह सब कुछ
तो कैसे नजरे मिलाऊंगा मैं
मन में हजारों सवाल है
दिमाग में कशमकश है
क्यों जी रहा हूं मैं
मुझे तो मर जाना है।
फिर दिल कहता है, जरा रुक,
ऐसा भी क्या मरना है
थोड़ी कोशिश तो कर ले
न हारना है ,न जितना है
न भागना है इस अंधी दौड़ में
मुझे तो सिर्फ चलना है,
तो,क्यों करूं मैं अपने जीवन की हत्या।
क्यों करूं मैं आत्महत्या ।।
मुझे तो जीना है।मुझे तो जीना है।।
माना की मैं कमजोर हूं
नहीं कर पा रहा हूं
उन होशियारों का मुकाबला
नहीं समझ पा रहा हूं
गुरुजनों का पढा़या पाठ
नहीं दे पा रहा हूं
अपने सपनों को उडा़न
नहीं बचा पा रहा हूं
अपने जीवन दाता का मान
क्या फिर भी मुझे हक है जीने का ?
मेरे अपने कहते हैं,
छोड़ो इन बातों को और
सीखो जिंदगी जीने का मंत्र
डॉक्टर इंजीनियर के अलावा भी
बहुत कुछ है करने को
अगर तुम नहीं कर पा रहे हो,
तब भी तुम मेरे लाडले हो ।
ना रूकती है जिंदगी यहां पर,
वह तो सिर्फ बढ़ती रहती है
अगर चले जाओगे तुम ऐसे ही
तो दुख ना होगा तुमको,
लेकिन जीते जी मर जाएंगे
जो करते हैं तुझसे बेहद प्यार ।
मैं समझ गया
नहीं करूंगा अंत ऐसे इस जिंदगी का
मुझे तो लड़ना है ,मुझे तो जितना है,
मुझे तो आपके साथ जीना है
आपके साथ रहना है
तो क्यों करूं मैं अपने जीवन की हत्या।
क्यों करूं मैं आत्महत्या ।।
मुझे तो जीना है। मुझे तो जीना है।।
माना कि ,मुझे प्यार हुआ है
पर वह है बड़े घर की लाली
और मैं हूं साधारण – सा लाल
जिसका जेब खर्च है औना -पौना
लेकिन प्यार है दोगुना
वह जा रही है मुझसे दूर
मैंने की मिन्नतें कई बार
फिर भी वह नहीं चाहती रुकना,
शायद उसपर भी है दबाव उसके घर का
फिर भी मैं संभल जाऊंगा,
ना रोऊंगा, ना पछताऊंगा
जब वह न रुकी मेरे लिए ,
तो मैं क्यों रुकू उसके लिए
भीड़ जाऊंगा , लड़ जाऊंगा मैं इस जीवन से,
उडना है आसमान में ,
लेकर अपने सपनों को
जीना है मुझे अपनी शर्तों पर,
फिर से बसानी है दुनिया मेरी,
तो क्यों करूं मैं अपने जीवन की हत्या।
क्यों करूं मैं आत्महत्या ।।
मुझे तो जीना है। मुझे तो जीना है।।
माना की ,हो जाता हूं मैं कभी हताश
मन में आता है एक ही विचार
क्यों जीना है?
सारी उलझनों का एक ही उपाय
मर जाना है,
अलविदा सभी से कहना है।
अगर जाना ही ऐसे, तो जरा- सा रुकना
जरा – सा ठहरना, सोचना ,बोलना , चिल्लाना
और कहना ,
अपने मां बाप भाई बहन यार दोस्त से,
मुझे ना जीना है
देखो , फिर वो क्या कहते हैं,
पहले हसेंगे, फिर डाटेंगे ,
कुछ कहेंगे और फिर समझाएंगे
सुनना उनको ध्यान से और समझना भी,
तब तक शायद वो विचार भी हवा हो जाए
और समझ आ जाए,
अंत नहीं है इसका समाधान
मुझे तो लड़ना है
मुझे तो जीना है। मुझे तो जीना है।।
माना की, मैं गलत था
वह एक इंपल्स था।
तनाव तो सभी को है,
बच्चों से लेकर बुड्ढों तक
तो मैं अपवाद कैसे?
जानता हूं इसी का नाम जिंदगी है
तो क्यों भाग रहा था मैं,
आज नहीं तो कल रुक जाना है ,
तो क्यों न जिऊं अभी मस्ती में
दे दिया विराम मैंने
उन कमजोर विचारों को।
जीना है मुझे उनके लिए
जिन्होंने मुझे जनम दिया,
जिन्होंने मुझे पढ़ाया
जो मेरे साथ खेले,
जो मेरे लिए जिए।
उन्हें मैं यूं ना रुलाऊंगा,
हठ मेरा वही करेंगे पूरा
मुझे यूं ही न जाना है
बस, मुझे तो जीना है । मुझे तो जीना है।।
डॉ मंजू राठी
एमबीबीएस एमडी/ एलएलबी एलएलएम
समाजसेविका




