🏥🏥🏥🏥🏥🏥🏥🏥🏥🏥🏥
❤️राजस्थान का राइट टू हेल्थ बिल।❤️
जानते हैं ,इसके बारे में।
यह कैसा बिल है।
एक भूखा प्यासा आदमी शहर की गलियों में भटक रहा होता है और उसे एकदम से एक अच्छा सा होटल दिखता है ।वहां जाकर वह होटल संचालक को कहता है उसे जोरो से भूख लगी है ,उसे खाना दे दो । उसको एक अच्छी सी टेबल पर बिठाया जाता है।
मेनू कार्ड सामने आ जाता है । वह बहुत सारा खाना ऑर्डर करता है। सारा खाना उसको परोसा जाता है और पेट भर खाने के बाद जब वेटर बिल पेश करता है तो वह आदमी जिसको खाना खाने के बाद ताकत आ चुकी होती है आग बबूला हो जाता है और कहता है इमरजेंसी में आया था और इसकी वजह से मुझे खाना फ्री में मिलना चाहिए। मैं इसका कोई पैसे देने वाला नहीं हूं ।अगर आपको पैसे चाहिए तो सरकार से ले लीजिए ।
होटल मालिक उसे समझाता है ऐसा नहीं हो सकता, बिल तो तुम्हें देना पड़ेगा ।इस बीच उनकी कहासुनी हो जाती है। वह आदमी अपने रिश्तेदारों को और अपने जानकारों को बुला लेता है और बिना सारा मामला जाने ही रिश्तेदार होटल संचालक की और वहां के वेटर की पिटाई कर देते हैं ,और होटल में भी तोड़फोड़ कर देते हैं।
बिचारा होटल मालिक! रो पीटकर रह जाता है। सरकार के पास गुहार लगाता है उसके खाने के पैसे देने के लिए। बड़ी सी फाइल बनाकर उसमें उस कस्टमर ने क्या-क्या खाया ,उसका बिल, उससे रिलेटेड सारी फोटोग्राफ्स सरकार को देता है। लेकिन फिर भी सरकार नहीं मानती और उसे कहते हैं कि तुम्हारी फोटोग्राफ क्लियर नहीं है, तुम्हारा बिल सही नहीं है ,इसलिए तुम सारी चीजें दोबारा अच्छे से दे दो। बिचारा होटल संचालक दोबारा सारी प्रक्रिया करता है। एक बड़ी सी फाइल बनाकर फिर देता है । कुछ महीनों बाद उसे इंदिरा रसोई के तर्ज पर उसके ₹2000 के खाने के लिए ₹8 दिए जाते हैं।
होटल संचालक सर पीट कर रह जाता है। ऐसा आए दिन उसके साथ होता रहता है । इसी बीच उसके ऊपर उसी कस्टमर ने घटिया खाना देने के लिए शिकायत कर दी है क्योंकि ज्यादा खाने से उसे उल्टी हो जाती है और उसे लगता है कि खाना अच्छा नहीं था। शिकायत निवारण कमेटी के पास केस आता है और होटल संचालक को सारे दस्तावेज पेश करने के लिए कहे जाते हैं ।बिचारा फिर सारे फोटोग्राफ्स ,खाने की क्वालिटी ,अपने सारे लाइसेंस उनके सामने पेश करता हैं लेकिन उस प्राधिकरण में खाने के और होटल व्यवसाय के बारे में जानने वाले कोई होते ही नहीं है ।और इसी वजह से उस होटल संचालक की बात कोई समझ नहीं पाता और उसपर घटिया खाना देने का इल्जाम लगाया जाता है और ₹25000 जुर्माना लगाया जाता है। बिचारा होटल संचालक एक बार फिर सर पीट कर रह जाता है और सोचता है कि इसकी शिकायत वह कोर्ट में करेगा लेकिन उसका वकील कहता है कि वह इसकी शिकायत कोर्ट में नहीं कर सकता क्योंकि उसके पास यह अधिकार ही नहीं है और उसे जुर्माना देना पड़ेगा ।
बेचारा!
इस प्रकार आए दिन होने वाली परेशानी से छुटकारा पाने के लिए एक दिन वह सोचता है कि यह होटल ही बंद कर दे। और उसने ऐसा ही किया और अपना बोरिया बिस्तर समेट कर वह राजस्थान छोड़कर दूसरे स्टेट में जाकर वहां पर एक अच्छा सा होटल शुरू कर देता है। खाना तो उसका पहले से ही अच्छा था, हाइजीनिक था ,क्वालिटी अच्छी थी तो उसका होटल चल निकला और कुछ ही दिनों में उसने अलग-अलग स्टेटस में अपने होटल्स खोल दिए। लेकिन उसकी एक शर्त है राजस्थान से आने वाले कस्टमर को वह दुगनी रेट में अपना खाना देगा। इसलिए उसने सबके आधार कार्ड देखना शुरु कर दिए। लेकिन फिर भी राजस्थानी वहां पर जाते, पेट भर के खाना खाते, दुगना पैसा देते , और उसकी तारीफ के पुल बांधते वाह! क्या खाना है! इससे उन्हें किसी भी तरह से कोई परेशानी नहीं होती थी।
बस यही है राजस्थान का राइट टू हेल्थ बिल ।✅✅
💯जनता, सोचो, समझो और सरकार की वोट बैंक की नीति से अपने आप को बचा लो।🙏🙏
डॉ मंजू राठी। किशनगढ़।