दोस्तों का खजाना

दोस्ती की कलम से – “दो शब्द “

“दोस्त, दोस्ती” ये शब्द हम बचपन से ही सुनते आ रहे हैं पर इन शब्दों का सही मतलब तो जब हम बड़े होते हैं तब समझ में आता है। अंग्रेजी में कहते हैं,

“A Friend in need is friend in dead.”

सच कहते है, जो दुःख में साथ निभाता है वह ही सच्चा मित्र होता है। पर आज दोस्ती की परिभाषा बदल गयी है- कहते हैं, “जो हमेशा साथ निभाता है वही सच्चा दोस्त होता है।”

दोस्तों, बिन दोस्तों के जिन्दगी नीरस होती है। दोस्तरूपी मोती हमेशा माला में होना जरूरी होता है। वरना उस माला का मोल साधारण रह जाता है और जितने ज्यादा यह मोती आपकी माला में होगें उतनी ही यह माला अनमोल होगी और आपका “दोस्तों का खजाना” उतना ही कीमती होगा।

जब हम बच्चें होते हैं तभी हमारे नन्हें-नन्हें दोस्त होते हैं। जब स्कूल में पढ़ने जाते है तब वो दोस्त अलग बन जाते हैं। कुछ तो इतने अंतरंग दोस्त बन जाते है कि जिन्दगीभर साथ रहते है जिन्हें हम “लंगोटिया यार” कहकर पुकारते है। कितना अच्छा लगता है जब ऐसा यार हमारे जिन्दगी के आखिरी पायदान तक हमारे साथ हो तो।

जवानी की दहलीज पर पाँव रखते है तो कॉलेज के दोस्त बन जाते हैं। बहुत खुबसूरत वो कुछ साल होते है जो जिन्दगीभर याद रहते हैं। दोस्तों के साथ घूमना-फिरना, पिक्चर देखना, हँसी-मजाक, लड़ाई-झगड़ा सबकुछ तो चलता है इस उम्र में उम्र का यह दौर ज्यादातर दोस्तों के साथ गुजारा हुआ जिन्दगी का वो खुबसूरत वक्त होता है जिसकी यादें हर इन्सान के जेहन में हमेशा तरोताजा रहती हैं भले ही ये दोस्त कितने ही सालों बाद मिले। उन कॉलेज के दिनों को याद करके हर इन्सान मुस्कुरा ही देता है।।

दोस्तों, उसके बाद शुरू होता है जिन्दगी का वो सफर जहाँ पर आपका हम सफर एक दोस्त बनकर आता है। जिन्दगी की नैया को ढोते ढोते अनेक नये दोस्त जुड़ जाते हैं, करियर के सोपान पर चढ़ते चढ़ते कुछ दोस्त बिछुड़ जाते हैं तो कुछ नये शामिल हो जाते हैं। कभी माँ बाप दोस्त बन जाते हैं, तो कभी भाई-बहिन, पर कोई ना कोई दोस्त जरूर रहता है। उसके बाद आती है वो उम्र जहाँ पर जिम्मेदारियाँ निभाने का वक्त आ जाता है उस वक्त उस उम्र में बच्चों का सफर अलग हो जाता हैं, कई अपने छोड़ जाते हैं तो कई दोस्तों का साथ छूट जाता है पर फिर भी जिन्दगी तो काटनी ही पड़ती है और उस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत महसूस होती है वह है दोस्तों की उस वक्त अगर यह दोस्तरूपी खजाना हमारे पास होता है, तो यह जिन्दगी का सफर आसानी से कट जाता है। उसके बाद आते है हम उम्र के उस पड़ाव पर जहाँ पर अपना शरीर साथ छोड़ने लग जाता है, अपना अजीज कहीं और दुनिया में बस जाता है- ऐसे में आने सुख-दुःख का साथी कोई और नहीं— बस वह दोस्त ही होता है जो हमारे साथ चलता है। यह हम दुनियाँ में आते हैं तो हमारे साथ जन्म से अनेक रिश्ते जुड़ जाते हैं और जाते हैं से और रिश्तों को तोड़ देते हैं पर यह दोस्ती का रिश्ता आपके जन्म से लेकर आपके आखिरी सफर तक अलग-अलग रूप में बनता है और आपका जीवन सुन्दर बनाता है।

दोस्तों, जन्म से अंत तक हमें इन दोस्तों की जरूरत होती है और इस वजह से हमारी जिन्दगी को आसान बनाने के लिए इस “दोस्तों का खजाना” को बढ़ाना चाहिए। यह खजान आपकी जिन्दगी की सबसे बड़ी कमाई है। यह रिश्ता आपका अपना है, अपने अंतरात्मा की पुकार से बनाया हुआ यह रिश्ता आपकी आखिरी साँस तक आपके साथ रहता है। आपके अपने आप को छोड़ जाते है पर यह अपना कभी नहीं छोड़ता।

“चाहे कितने भी दूर रहें,

दोस्ती के सिलसिले कभी कम ना होंगे ……

जब भी लगे की तुम तन्हा हो, पलट कर देखना,

तुम्हारे साये की जगह हम होंगे।।”

दोस्तों, यह पुस्तक “दोस्तों का खजाना” भी यही कहती है कि अपनी जिन्दगी सुन्दर बनाने के लिए “दोस्तों की श्रृंखला ” बनाइये। अगर दोस्तों की यह चेन हम बनाते हुये यह खुबसूरत जिन्दगी का सफर तय करेंगे तो जिन्दगी की मुश्किल से मुश्किल घड़ी भी चुटकियों में बीत जायेगी और यह दोस्तों की श्रृंखला इतनी बढ़ जायेगी कि दुश्मन नाम की कोई चीज इस दुनिया में ना रहेगी। दुनिया का नक्शा इस दोस्तरूपी श्रृंखला से कुछ अलग ही बन जायेगा जिसमें राग, द्वेष, घृणा का कोई स्थान नहीं होगा और सारे जहाँ में सुख-चैन, अमन का डंका बजेगा।।

तो दोस्तों, आईये– पढ़िये, यह “दोस्तों का खजाना” और जानिए कि यह दोस्तरूपों मोती हमारी जिन्दगी के साथ-साथ इस समाज में भी किस तरह बदलाव ले आते हैं। अगर हर जगह यह दोस्तों की श्रृंखला तैयार हो गयी तो वो दिन दून नहीं जब इस दुनिया का हर इन्सान खुश होगा।

दोस्तों, इस दोस्तरूपी माला को बढ़ने दीजिए और यह माला इतनी मजबूत बनाईये कि इसमें कोई भी सेंध ना लगा सके। यह अटूट रिश्ता हमेशा संजोए रखिए। इस रिश्ते से हमेशा ‘स्वस्थ रहिए खुश रहिए।”

डॉ. मंजू राठी
एम.बी.बी.एस. एम.डी. एल.एल.बी. एल.एल.एम
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