जागो , सरकारों जागो।
न्यूज़ पेपर में खबर पढ़ी ,”ढोल नगाड़े के साथ आर्यन खान का स्वागत ” किया गया। स्वयं शाहरुख खान अपने बेटे को लेने गए , पर कार से नहीं उतरे। क्यों ? शर्म आ रही थी दुनिया से नजरें मिलाने में या फिर फैंस से डर गए थे । जो भी हो – वह जाने ।
मेरे मन में विचार आया , खान साहबजादे क्या जंग जीत कर आए थे? जिसका स्वागत ढोल नगाड़े से किया जा रहा है , जनता उनके पीछे पागल हो रही है ? एक कैदी का जेल से बाहर आने का इंतजार हो रहा है! क्यों? क्या जनता इतनी निकम्मी है ? क्या जनता के पास काम धंधा नहीं है? क्या उन्हें अपनी रोजी-रोटी की चिंता नहीं है ?
इन तमाम सवालों का जवाब जनता के पास तो नहीं होगा, क्योंकि उन्हें तो किसी अभिनेता के नशाखोर पुत्र के दर्शन से ही फुर्सत नहीं है , वह देश के बारे में क्या सोचेंगे और देश की सेवा क्या करेंगे ! उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता बॉर्डर पर दिन-रात वीरगति को प्राप्त होने वाले सैनिकों की शहादत से । उन्हें तो चाहिए किसी अभिनेता की चापलूसी करना । हां, अगर अभिनेता का सम्मान ही करना हो तो पुनीत राजकुमार जैसे अभिनेता का कीजिए जिसने अपना सारा जीवन अपनी जनता की भलाई के लिए अर्पित कर दिया । अपना सर्वस्व उन पर न्योछावर कर दिया ।
लेकिन एक सवाल अभी भी अनुत्तरित है जिसका जवाब में जनता से नहीं बल्कि जनता को निकम्मा बनाने वाली सरकारों से , अपने नेताओं से मांगना चाहती हूं । इस जनता को ऐसे फालतू कार्यों के लिए वक्त कहां से मिलता है ? क्या इसके लिए सरकार स्वयं जिम्मेदार नहीं है? जिसे खाना, मकान ,कपड़ा मुफ्त में दिया जाता है, बीमार पड़ जाए तो मुफ्त इलाज किया जाता है , बच्चा पैदा किया तो पैसा , घी ,दाल चावल दिया जाता है। जब सभी सुविधाएं मुफ्त मुहैया कराई गई है तो उन्हें काम करने की क्या जरूरत है । टाइमपास के लिए तो हम कहीं पर भी भीड़ इकट्ठा करके खड़े हो जाएंगे और ढोल नगाडे के साथ नाच कर स्वयं का और भीड़ का मन बहला लेंगे और उसके लिए अखबार में मुक्त की फोटो भी सब जाएगी। जब सब कुछ मुफ्त का मिल रहा है तो टाइम पास के लिए ऐसे उद्योग करना भी तो जरूरी है तभी तो मन लगा रहेगा वरना बोर हो जाएंगे।रोज-रोज चौपालों पर खाली बैठकर कब तक मन बहलाते रहेंगे !
जागो ,सरकारों जागो !
डॉ मंजू राठी
एमबीबीएस एमडी
एल एल बी एल एल एम
Sahi hai
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Thanks
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