व्हाट्सएप के दोस्त
विवेक को सुबह सुबह फोन आया कि उसकी मां बीमार है और उसको अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया है और आप आकर उन्हें संभाल ले। विवेक को आश्चर्य हुआ कि ऐसे अनजान नंबर से उसके पास कहां से कॉल आ गई ।उसने पूछा ,
“आप कौन बोल रहे हैं?”
तो जवाब आया , “हम तुम्हारी मां के व्हाट्सएप ग्रुप के दोस्त लोग बोल रहे हैं “।
विवेक फटाफट गाड़ी लेकर घर से निकला और बताए हुए पते पर अस्पताल पहुंच गया । वहां जा कर देखता है तो वाकई मां की हालत काफी खराब थी । डॉक्टर से बातचीत करने पर पता चला कि मां को हल्का सा हार्ट अटैक हुआ है और उसको तुरंत इलाज देने की वजह से अब काफी आराम है और कोई अनहोनी होने से बच गई थी । वह जब मां से मिलने गया तो मां सिर्फ मुस्कुरा दी ।
” अब कैसी हो मां ? “उसने पूछा।
“मैं ठीक हूं ” मां ने कहा।
उसके जेहन में काफी देर से एक सवाल खड़ा हो रहा था कि इस उम्र में भी मां के कोई दोस्त हो सकते हैं?
वह थोड़ी उलझन में था । मां समझ गई। उसने पूछा ,” क्या हुआ? क्यों परेशान हो बेटा ? क्या उलझन है तुम्हें ?”
“क्या इस उम्र में भी आपके कोई दोस्त है ?”उसने हिचकीचाते हुए पूछा।
” हां ! है !” मां ने मुस्कुराते हुए कहा । फिर वह आगे बोली,
“बेटा , तुम लोग तो हमसे दूर रहते हो। मैं अकेली रहती हूं । तुम्हारे पापा के जाने के बाद तुम मुझसे कितनी बार मिलने आए हो ?कभी मेरी खैर खबर भी ली है ? फिर मुझे भी तो अपना मन लगाने के लिए दोस्त बनाने पड़ेंगे ना ? “
“क्या ? व्हाट्सएप दोस्त भी कोई दोस्त होते हैं क्या ? ऐसे दोस्त कोई काम के नहीं होते ? ऐसे दोस्त बनाना नही चाहिए मां ? क्या मां ,आप भी ऐसे दोस्त बनाने लग गई ! ” उसकी आवाज में थोड़ी खींज थी।
मां समझाने लगी, ” नहीं रे बेटा , हम जैसे अकेले रहने वाले लोगों ने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है और व्हाट्सएप ग्रुप में हम लोगों को सुबह और शाम दोनों वक्त अपनी हाजिरी देनी होती है , अगर जिस दिन हम में से किसी ने हाजिरी नहीं दी , तो हमारे आसपास रहने वाला कोई भी हमारा व्हाट्सएप दोस्त उस इंसान के घर जाता है और देखता है कि कोई तकलीफ तो नहीं है । और ऐसे हम अकेले रहने वाले बहुत सारे लोग इस ग्रुप में जुड़े हुए हैं ।आज सुबह मेरी हाजिरी नहीं गई तो हमारे पास में ही रहने वाले दोस्त घर आ गए और मुझे अस्पताल पहुंचा दिया।”
मां की बात सुनकर उसका सर शर्म से झुक गया ।उसे अपनी गलती का एहसास हो गया । उसने उसे जन्म देने वाली मां के साथ कितना बड़ा अन्याय किया है, यह समझ में आ गया था। अब वह अपने बीवी की या अपने दोस्तों की , किसी की नहीं सुनने वाला था । अब उसकी अंतरात्मा की आवाज उसने सुन ली थी । उसे एहसास हो गया की उसने अपनी मां के साथ अत्याचार किया , उसको इस उम्र मैं अकेला छोड़ दिया । उसे अपने इस कृत्य पर ग्लानि हुई।आज मां के व्हाट्सएप दोस्तों ने उसे बचा लिया था । सच में, आज पहली बार उसे व्हाट्सएप के दोस्तों पर गर्व हुआ और उसने मां के व्हाट्सएप दोस्तों को दिल से अभिवादन किया ।
” मां ! मुझे माफ कर दो ” कहकर वह अपने मां के कदमों में गिर पड़ा।उसके बाद वह खुद अपनी मां के पास अपने परिवार के साथ रहने आ गया।
डॉ. मंजू राठी
एमबीबीएस एमडी
एलएलबी एलएलएम


