डॉक्टर्स डे – एक जुलाई

डॉक्टर्स डे

एक जुलाई

एक जुलाई “डॉक्टर्स डे “ के नाम से और “सी ए “ डे के नाम से जाना जाता है ।यह दिन सिर्फ़ डॉक्टरी पेशे से जुड़े हुये लोगों को ही याद रहता है । ऐसा क्यों?

सारे डॉक्टर इस दिन को मनाते हैं । पर क्या जनता भी उन्हें कभी याद करती है ? जिस जनता के लिए यह डॉक्टर रूपी समाज अपना सर्वस्व अर्पित करता है उस जनता को इन डॉक्टरों से कोई लेना देना नहीं होता है । उन्हें तो सिर्फ़ उनकी बीमारी में ही इन डॉक्टर्स की याद आती है ।जनता हमेशा किसी का जन्मदिन ,मरण दिन , या किसी पॉलिटिशियन का कोई प्रोग्राम मनाने में इतनी व्यस्त रहती है कि उन्हें ऐसे दिन कभी याद ही नहीं आते है ।ज़िंदगी देने वाले और ज़िंदगी बचाने वाले को उन्हें याद करना कभी गँवारा नहीं होता।

पॉलिटिशियन के छोटे मोटे कार्यक्रमों के बड़े बड़े होर्डिंग्स शहर के गली, मोहल्ले और चौराहे पर लगे हुए नज़र आते हैं ।पर डॉक्टर्स डे पर डॉक्टर्स को बधाई देने वाला एक छोटा सा बैनर भी कभी नज़र नहीं आएगा ।वाह ! क्या ज़माना आ गया ? डॉक्टर को कौन याद करता है ? उसे तो सिर्फ़ तक़लीफ़ में याद किया जाता है और उसकी भी वह फ़ीस लेता है । वह एक सर्विस प्रोवाइडर है और आप उसे पैसे देकर एक कन्जयूमर बन चुके हो । वह अब व्यापारी बन गया है । फिर भले ही उसने अपना सर्वस्व यानी अपनी जवानी , अपना परिवार , अपना सुख चैन क्यों न छोड़ दिया हो , हमें उससे कोई लेना देना नहीं है !

स्वयं का सुख चैन त्यागकर , स्वयं की रातों की नींद कुरबान करके , सतर्क क्रियाशील रहने वाले इस इंसान ने आपके लिए हमेशा यमराज से झगड़ा किया है । आपको मौत के मुँह से खींच कर लाने वाले डॉक्टर की बिसात ही क्या है इस समाज में ? सिर्फ़ पैसे देकर ख़रीदा गया एक चिकित्सक । जिसने इतनी लंबी पढ़ाई की ,अपनी जवानी उन किताबों में खपा दी , जिसे जवानी में मौज मस्ती करनी चाहिए उसने अपना सारा वक़्त अस्पताल में बिता दिया।जिसने सेवा भावना का व्रत धारण किया हो , उस डॉक्टर को कौन पूछेगा ? हमें तो इलाज से मतलब है वो हमें मिल जाता है ।वह हमारा मौलिक अधिकार है। पर एक डॉक्टर को ज़िंदगी जीने का मौलिक अधिकार क्यों नहीं है? महीने में बीस दिन परोसी हुई थाली ठंडी हो जाती है या फिर कभी कभी अन्न का एक दाना भी नसीब नहीं होता । भुखा-प्यासा अपने भगवान रुपी मरीज़ों की सेवा में तत्पर रहने वाला प्राणी है यह डॉक्टर , जो हर घड़ी अपने आस पास के मरीज़ों में भगवान का रुप देखता रहता है। उसकी निजी ज़िंदगी इतनी कठोर हो जाती है कि माँ बाप तरस जाते हैं अपने लाडले से बात करने के लिए ,उसे देखने के लिए , पत्नी का जीवन यूँ ही बित जाता है उसके इंतज़ार में ,बच्चे पापा की बाट जोहते हुये नीद की आग़ोश में चले जाते हैं ।और यह डॉक्टर रुपी इंसान जिसे उसके घर वाले बिना दिल का प्राणी कहकर पुकारते हैं उसे अपनों के लिए वक़्त नहीं होता और अपने मरजी के लिए सारी ज़िंदगी होती है। कभी घूमने जाने के लिए तैयार फ़ैमिली , डिनर पर ले जाने के लिए तैयार हुई फ़ैमिली को मरीज़ के लिए मना करते हुये क्या कभी उसे अफ़सोस नहीं होता? उन्हें नाराज़ करके क्या वह ख़ुश होता है ? उस वक़्त उसके और उसके फ़ैमिली के दिल का क्या हाल होता होगा शायद उसका अंदाज़ा भी उस मरीज़ या उसके रिश्तेदारों को नहीं होता होगा । क्या ऐसे वक़्त पर वो पैसे के लिए रुकता है? शायद आपकी सोच में इसका जवाब “हाँ “ हो सकता है पर उस डॉक्टर की सोच में उसे “इंसानियत “ कहते हैं ।परिवार जनों से झगड़ा मोल लेकर ,उनका ग़ुस्सा सहन कर , अपने चेहरे पर हमेशा प्रसन्नता रखकर , मुस्कुराता हुआ वह सतत काम करता रहता है । क्यों ? कभी सोचा है आपने?

एक दिन के लिए यह सोच लो कि दुनिया में कोई डॉक्टर नहीं है । यह दुनिया बिना डॉक्टर के ही बनी है। फिर देखो , शायद ये सोच कर ही आपको चक्कर आने लग जाए , दिमाग़ सन्न पड़ जाए और ऐसे एक दिन की कल्पना भी आप शायद ना कर पाएँ। कोरोना काल में ऐसा एक दिन आप सोचकर तो देखिए आपके पाँवतले की ज़मीन खिसक जाएगी ।आपके लात घुसे खाकर , आपके ग़ुस्से का सामना करते हुए भी डॉक्टर सतत कार्य करता है क्? आप इसे क्या कहेंगे ? इसे आप इंसान कहेंगे या कोई और नाम देंगे । क्या यह इसी धरती का प्राणी या किसी और प्लेनेट से आया हुआ एलियन है।

सतत् 24 घंटे कार्यरत रहने वाले इस इंसान के लिए आपके मन में कभी कोई कृतझता नहीं झलकती । ख़ैर! कोई बात नहीं ।आप लोगों का कोई दोष नहीं है। क्यूंकि आज कल कंज्यूमर का ज़माना है । डॉक्टर की सेवा का कोई मोल नहीं है ।किसी को उससे कोई लेना देना नहीं है ।आप पैसा देते हैं और बदले में डॉक्टर काम करता है , यहीं आपकी सोच है।

आपको गंदगी देखकर घृणा आती है ,बदबू से आपको उल्टी आ जाती है ।पर डॉक्टर एक ऐसी कौम है, एक एैसा प्राणी है , जिसे घृणा , गंदगी , व्देष , अच्छा -बुरा कुछ ज्ञात नहीं ।सतत आप जैसे मरीज़ों के सान्निध्य में रहकर आपकी बीमारियों से ग्रसित होकर भी वह मुस्कुराता हुआ आपके सामने आता है , क्योंकि उसके दिल में तो सिर्फ़ और सिर्फ़ आप ही हो , फिर भले ही आपके दिल में वो ना हो ।उससे उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ता । वो आनादिकाल से आपके लिए जिता आया है आैर जिता ही रहेगा ।

ज़माना बदल गया , आपकी सोच बदल गई ।पर क्यों ?डॉक्टर क्यों नहीं बदल पाया !शायद उसे भी ज़माने के साथ बदलना चाहिए था ।पर नहीं ! यह डॉक्टर पता नहीं किस मिट्टी का बना है । ये ना कभी बदलेगा और ना ही कभी थकेगा फिर ऐसे कितने ही कोरोना क्यों न आए ,वह निरंतर काम करता रहेगा भले ही आप उसे याद करें या न करें ।

“ डॉक्टर्स डे “ पर सभी डॉक्टर कम्यूनिटी को मेरी तरफ़ से तहे दिल से शुभकामनाएं !

“तुम जियो हज़ारों साल

और साल के दिन हो पचास हज़ार “

HAPPY DOCTOR’S DAY

डॉक्टर मंजू राठी

MBBS MD

LLB LLM

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