इंसान— इंसानियत और कोरोना

मन उद्दीग्न होता है जब चौबीसों घंटे TV पर कोरोना की निगेटिव तस्वीरें दिखाई जाती है , ऐसा लगता है जैसे कोरोना हो गया हो , इन ख़बरों को देखकर । अखबार देखकर हाथ कॉंपनें लग जाते , पूरे अख़बारों में शोक संदेश हैं और कोरोना की ख़बरें हैं ।मोबाइल पर , वॉट्सऐप सभी पर कोरोना , कोरोना और कोरोना ।
हम जीना भी भूल गए ।कब तक इंसान इस दहशत के साये में जीता रहेगा ? कब हमारी सोच बदलेगी ? कब हम सुधरेंगे ? कब यह इंसान इंसानियत दिखाते हुए कोरोना को मात देगा? कब?
पूरे विश्व में कोरोना आपातकाल चल रहा है ।पूरी मानव जाति का भविष्य दाँव पर लगा हुआ है ।कोरोना के रूप में एक महाप्रलय आ गया है ।कोरोना महाप्रलय में कितनी इंसानी आत्माऐं डुब चुकी है और जो बच गई वो क्या वाकई इंसानियत निभा रही है ? आपदा को अवसर में बदलने वाले इंसान जब जगह जगह पर दिखाई पड़ते हैं तो ऐसे लगता है ऊपर वाले ने यह महाप्रलय इसलिए तो प्रकट नहीं किया हो ताकि इंसान इंसान को पहचानें और विश्व में इंसानियत नाम की कोई चीज़ बची रहे!
आज इंसान बेबस है ।देश चलाने वाली सरकारें बेबस हो चुकी है । डॉक्टर ,पुलिस ,नर्सिंगकर्मी अपनी क्षमता से ज़्यादा काम कर रहे है ।मानव जाति को बचाने की जीतोड़ कोशिश की जा रही है। लेकिन कुछ इंसान ऐसे भी हैं जो इस आपदा में भी अपना मुनाफा ढूंढ रहे हैं और मौत के सौदागर बन रहे है।शायद उन्होंने अपनी शर्म और इंसानियत दोनों ही बेच दी है।
फ्रंट लाईन वॉरियर्स अपनी जान पर खेलकर इंसान की जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं ।डॉक्टर जी तोड़ कोशिश कर रहा है ।पुलिस वाले दिन रात इंसान को घर पर बिठाकर रखने की कोशिश कर रहे हैं ।पर हम इंसान की समझ में कुछ आए तब ना? सालभर हो गया हमें समझाते हुए ।
बिना काम के घर से ना निकले पर हमें समझ कहाँ आता है ? हमारा अपना कर्तव्य हम भूल गए और दोष दे रहे हैं सरकारों को कि वो इस आपदा से निपटने में नाकाम रही ।अरे , ज़रा सोचो , इस आपदा को फ़ैलाया किसने ? हम ही लोगों ने । भीड में मत जाओ , पर हम कहाँ मानते हैं । मास्क लगावाे , पर हमें शर्म आती है ! पार्टियाँ, शादियाँ , रैलियाँ , मेले इन सभी में हमें ही तो जाना है । हम अपने आप को क्यों नहीं रोक पाए ? क्या इंसान की जान इतनी सस्ती है ?
अब इंसान हाय तौबा कर रहा है ।अस्पताल में बेड नहीं ,ऑक्सीजन की कमी है ,वेंटिलेटर नहीं है , दवाइयाें की कमी है । अरे , ये ऑक्सीजन , ये दवाइयां ,ये बेड हमारी क्षमता से ज्यादा चाहिए जिसे हम पूरे करने में असफल रहे क्योंकि मुनाफ़ाख़ोरी करने वालों ने दवाइयां , इंजेक्शन के दाम बढ़ा दिए ।ऑक्सीजन के सिलेंडर छुपाकर रखे गये । हर जगह करप्शन शुरू हो गया ।इंसान इंसानियत भूल गया ।
लाखों रुपये में नक़ली इंजेक्शन बेचे जा रहे हैं और बेचारा डॉक्टर उसे असली समझ कर लगा रहा है और सोच रहा है की ये असर क्यों नहीं कर रहा है ? ऑक्सीजन के लिए तड़प तड़प तड़प कर मरने वालों के लिए मुनाफ़ाखोरो के दिल में कोई दया भाव नहीं है । वे ऑक्सीजन कंसंटेटर के लिये मुँह माँगी क़ीमत माँग रहे हैं ?
क्या ज़माना आ गया ? जिस देश में इंसानियत की मिसाल दी जाती उस देश के आज ये हाल ? बड़े अफ़सोस की बात है!
सोने पर सुहागा , अपनी सस्ती पब्लिसिटी के लिए कई लोग बिना सोचे समझे उस डॉक्टर को हत्यारा कहता है जो दिन रात अपनी जान की परवाह किए बिना मरीज़ों का इलाज कर रहा है ।और साथ में कितना घटिया इल्जाम की, मरीज़ को मारकर उसके अंगों की तस्करी की जाती है ।
वाह! क्या कहना ! शर्म आती है ऐसे लोगों पर !
कोई बंदा अपने चैनल की TRP बढ़ाने के लिए कोरोना से होने वाली इन मौतों को नरसंहार की संज्ञा देकर उस डॉक्टर को गाली दे रहा है जिसके हाथों से लाखों करोड़ों लोग ठीक होकर अपने घर गए हैं ।वो इंसान जिस थाली में खाया उसी में छेद कर रहा है ।क्या होता है नरसंहार ? आपके चैनल पर दिखाए जाने वाली एडवर्टाइज़िंग की तरह अपने घरों के बाहर लटकाकर लोगों को दिखाएंगें हमारे घर में मौत हुई है ? आपको यह नहीं दिखता कि घर में कोई ज़िंदा बच कर वापस भी आया है और अपनों के साथ है । क्या बात है !क्या यही हमारी इंसानियत है!
एक ट्रक ड्राइवर बिना कुछ खाए पिए पूरी स्पीड से टैंकर दौड़ाता हुआ चला आ रहा है कि उसे जल्दी पहुँचना है ताकि वो इंसान की जान बचा सके ,उसके पास जो ऑक्सीजन है वह कितनाें की जान है , ये वो समझ रहा है ।और उसकी इंसानियत के आगे उन नेताओं की इंसानियत कहा मर गई , जब बीच रास्ते में उस टैंकर को रुकवाकर सिर्फ़ फ़ोटो खिंचवाने के लिए जब कई घंटे बर्बाद कर दिए और उसकी इस हरकत से कितनाें की साँसे उखड़ गयी । उस नेता के लिए वे मौतें सिर्फ़ एक नम्बर हो पर जिन घर वालों ने अपने को खोया उनका दुख़ शायद शब्दों में बयाँ करना मुश्किल है। कहाँ गई वो इंसानियत ?
कोई बुजुर्ग शहीद हो गया इंसानियत की ख़ातिर जिसने अपना बेड किसी युवा के नाम कर दिया और स्वयं ने मौत को गले लगा लिया ।सलाम है ऐसी इंसानियत को ।
डॉक्टर ICU में भर्ती मरीज़ के लिए दुआ कर रहा है , किसी तरह ये मरीज़ बच जाए ,जो वेंटिलेटर पर है और ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रहा है ।और बाहर वेंटिलेटर बेड के लिए लाइन में लगा हुआ मरिज और उसके रिश्तेदार दुआ कर रहे हैं कि किसी तरह उन्हें वेंटिलेटर वाला बेड मिल जाएं। अब आप सोचो , किसकी दुआ कबूल होगी? भगवान भी कन्फ़्यूज़न में हो गए होंगे कि किसकी दुआ क़बूल की जाए ?
स्थिति विकट है ,सभी जानते हैं ।पर जिस तरह डॉक्टरों की और डॉक्टरों की सेवाओं पर सरकारें लगाम लगा रही है, क्या उसी तरह सरकार में इतनी हिम्मत नहीं है कि वो इन मुनाफाखोरों पर लगाम लगाए ? फ़ार्मा कंपनी पर बढ़ती हुई क़ीमतों के लिये लगाम कसें । दवाइयों की क़ीमत ,वैक्सीन के लिए एक दर हो जिससे की मुनाफ़ाख़ोरी न हो ।जल्द से जल्द सभी को वैक्सीन लगे जिससे हम इस आपदा पर क़ाबू पा सके।
स्थिति गंभीर है । संभलना और संभालना हमें ही है ।सभी अपने कर्तव्यों का वहन कीजिए ।हम इंसान है ,इंसानियत को बचाना है । और कोरोना को हराना है।
जय हिन्द।
डॉक्टर मंजू राठी
M B B S . M D
L L B .L L M