जनता की याददाश्त

जनता की याददाश्त

जागो ,जनता जागो !

आज दुनिया की रफ़्तार रूक गई है । पूरा संसार करोनामय हो गया है । सभी जगह कोरोना -कोरोना । कोरोना इस एक बीमारी ने पूरी दुनिया को अपने वश में कर लिया है। हमारे देश में भी यही स्थिति है , या यूँ कहिए कुछ ज़्यादा ही भयावह है । सरकार सभी अस्पतालों में मरीज़ों के लिए बेड और ऑक्सीजन की व्यवस्था करने में जुटी हुई है ।आज बेड के लिए सभी और त्राहि त्राहि मची हुई है ।

तथाकथित नेता जो कभी सर उठाकर , सीना तानकर , किसी भी वक़्त , किसी भी अस्पताल में डॉक्टर पर रोब ज़माने पहुँच जाते थे , आज बड़े ही अदब से डॉक्टर से बेड माँग रहे हैं ।ऑक्सीजन और वेंटिलेटर पर मरीज़ को रखने के लिए मिन्नतें कर रहे हैं ।जिस ऑक्सीजन और वेंटिलेटर पर मरीज़ को रखने के लिए डॉक्टर को लुटेरा कहा जाता था , वो ही आज रिक्वेस्ट कर रहे हैं। स्थिति बिलकुल उलट है । डॉक्टर ने कुछ ज़्यादा ही दवाईया मंगवा ली और अपने पास रख ली ऐसा कहने वाले आज दवाईयों के लिए चक्कर काट रहे हैं । कहाँ गया उनका सीना तानकर डॉक्टर से बात करने का अंदाज़ ?

आज भी वही डॉक्टर है , वहीं स्टाफ़ है , वहीं नर्सेस है , जिनको यही जनता हमेशा दोष देती आ रही थी । बिना गलती के भी उनसे मारपीट करती थी , या उनके अस्पताल को चकनाचूर कर देती थी , उनकी मशीनों को बिना सोचे समझे तोड़ देती थी । आज ऐसा क्या हो गया ?

सब कुछ तो वही है ! सिर्फ़ बदली है तो एक बीमारी । फिर इस जनता का रवैया कैसे बदल गया ? आए दिन डॉक्टर के लिए अपशब्द कहने वाले , लुटेरा , डाकू , हत्यारा कहने वाले आज कहाँ है ? क्या वाक़ई उन्हें एक डॉक्टर की अहमियत समझ में आ रही है ? गाड़ी , बंगला , बैंक बैलेंस कुछ भी तो एक ज़िंदगी को नहीं ख़रीद सकती, क्या यह जनता की समझ में आ रहा है ? सिर्फ़ डॉक्टर , स्टाफ़ , अस्पताल और अस्पताल की मशीने ही मनुष्य का जीवन बचा सकती है यह जनता की समझ में आ गया ?

क्या यह महामारी ख़त्म होने के बाद जनता की याददाश्त फिर से चली जाएगी? फिर नए नेता पैदा हो जाएंगे ? फिर से डॉक्टर के साथ वही सलूक होगा ,ये तो अब जनता को सोचना है ।कुछ भी हो जाए , कोई भी बीमारी आ जाए , देश में और कोई भी आपदा आ जाए ,जनता बदल सकती है, नेता बदल सकते हैं , सरकारें बदल सकती है पर डॉक्टर तो वही रहेगा , अभी भी , बाद में भी और सदा सदा के लिए भी।

“जनता की याददाश्त कमज़ोर होती है “,ऐसा सारे नेता कहते हैं । पर अब वक़्त आ गया है , जनता को अपनी याददाश्त तेज़ करनी होगी । जनता को समझना होगा की ज़िंदगी से ऊपर कुछ भी नहीं है । ज़िंदगी बचाने वाला कभी हत्यारा नहीं होता ! आज लाखों ख़र्च करके भी अपने अज़ीज़ के लिए बेड तो दूर की बात , अस्पताल के एक कोने में फ़र्श पर एक गद्दी और पास में ऑक्सिजन सिलिंडर जुटाना जंग जीतने जैसा हो गया हो उन्हें अब इस डॉक्टर की अहमियत समझ में आ जानी चाहिए ।डॉक्टर को भगवान का दर्जा मत दो पर एक इंसान समझ कर उससे व्यवहार करो ,डॉक्टर गदगद हो जाएगा।

जनता अभी भी वक़्त है ,जाग जाओ ! ज़िंदगी की अहमियत बिना डॉक्टर के क्या है यह अब आपकी समझ में आ गया होगा ।अपनी याददाश्त को तेज रखना , इसको विस्मृति के बादलों में दफ़न मत करना । और हाँ , याद रखना, आज कोरोना है , कल कोई और बीमारी होगी ,डॉक्टर वही रहेगा , पर अाप मत बदल जाना ।

डॉक्टर को एक इंसान ही रहने देना , उसे भगवान न बनाना ।और अपनी याददाश्त को ज़रा तेज़ ही रखना ।

जागो , जनता जागो !

डॉक्टर मंजू राठी

MBBS MD

LLB LLM

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