चुनावी रंग

जागो ,जनता जागो !
जैसे ही चुनावी बिगुल बजता है ,चुनावी चौसर सजने लगती है ।पूरे प्रदेश में को चुनावी रंग चढ़ जाता है । सभी पार्टियां अपने चुनावी वादों की शृंखला तैयार कर लेती है । मनमोहक , मन लुभावने वाले वादे देख कर और सुनकर मन गदगद हो जाता है । लगता है उन्होने आपके मन की बात जान ली। ऐसे ऐसे सपने दिखाए जाते हैं की जनता उन्हें देखकर सातवें आसमान पर चढ़ जाती है । जनता को लगता है ऐसा नेता न कभी हुआ था और न ही होगा । उसे वोट देकर , उसे जिताकर , उनका उद्धार होना निश्चित है । पर क्या ? जनता कभी आपने सोचा है हक़ीक़त में ऐसा होता है ? इतने सालों से आप पार्टी बदल बदलकर वोट देते आ रहे थे , कभी किसी पार्टी को तो कभी किसी पार्टी का नेता चुन कर अपने ऊपर थोप रहे हो ,पर आपके विकास का क्या ? वो तो ज्यों का त्यों ही रह जाता है । हर साल दो साल में कोई ना कोई चुनाव आ ही जाता है और हम भोली भाली जनता अपना अधिकार निभाने के लिए हर बार लाइन में जाकर अपनी उंगली पर ठप्पा लगाकर शान महसूस करते हैं कि हमने अपना कर्तव्य निभा दिया ।पर वास्तव में आपने अपना कर्तव्य निभाया ?कभी सोचा इस बारे में अापने!
कभी तो इस पर मंथन कीजिए । हर बार आप बड़ी शिद्दत से अपना कर्तव्य निभाते आ रहे हो और हर बार आपको मुँह की खानी पड़ जाती है । कितनी उम्मीदों के साथ आप अपने नेता , अपनी पार्टी को चुनते हो और जब चुनावी रंग फीका पड़ जाता है तब वो वादे ,वो मुलाखातें ,वो सपने सब ख़त्म हो जाते हैं और रह जाते हैं तो वो सिर्फ़ कोरे 5 साल । जिसमें ये भोली भाली जनता अपना सब कुछ लुटा कर चुपचाप बैठ जाती है और जैसे ही फिर से चुनावी बिगुल बजता है , फिर ज़ोर शोर से जुट जाती है उसकी तैयारियों में ।
अरे जनता , ज़रा सोचिए , क्या सारी उम्र यही करना है ?कोई पार्टी ख़राब नहीं है ,कोई नेता ख़राब नहीं है ,ख़राब है तो जनता , उन्हें उस पार्टी से -उस नेता से सवाल जवाब करना नहीं आता । किसी भीड़ में उपद्रव मचाना हो तो दो- चार पत्थर राह चलता इंसान भी फेंक आएगा ।पर अपने अधिकारों के लिए वह कभी क्यों नहीं आगे आता?
सोचो ,जनता सोचो !
जनता आप किसी की ग़ुलाम नहीं है, आप अक्लमंद है ।आपको अपना भविष्य देखना है । अपनी आने वाली पीढ़ी का भविष्य देखना है । अभी मौक़ा है कुछ कर दिखाने का । जागीए और देखिए , आप कहाँ खड़े हो ! उसी दलदल में दोबारा फँसने से अच्छा है अपना फ़र्ज़ निभाईयें और अपनी समस्याओं का एक चुनावी परिपत्र तैयार कीजिए और पूछे उस पार्टी से ,उस नेता से, क्या वह उन पर अंमल करेगा ?ऐसे ही विश्वास मत कीजिए , ठोस प्रमाण लिजिए और फिर ही अपना नेता चुनीए। आपको किसी से कोई लेना देना नहीं है , आपको लेना देना है तो सिर्फ़ आपके अपने विकास , अपनी उन्नति से ,वरना फिर अगले चुनाव में दिखा दीजिए अपनी असली ताक़त। भूलिएगा नहीं।
जागो ,जनता जागो ।
अपना नेता स्वयं तैयार करो और स्वयं का विकास करने की कोशिश करो । भीड़ का हिस्सा बनने से अच्छा है अपना अस्तित्व दिखाइए ।वोट आपका अधिकार है तो किसे वोट देना है यह आपका हक़ है और जनता से किए हुए वादे पूरे करना नेता का कर्तव्य है । यह जब तक आपके समझ में नहीं आएगा तब तक आप “भोली भाली जनता “ ,
“कमज़ोर याददाश्त वाली जनता “ इन तमगों से सुशोभित होती रहोगी।
जागो ,जनता जागो !
अब तो जाग जाइए!
डॉक्टर मंजू राठी
MBBS MD
LLB LLM