DESERVING CANDIDATE— RESERVED CANDIDATE AND BRAIN DRAIN

रोज न्यूज़ चैनल पर देखते हैं और न्यूज़ पेपर में पढ़ते भी है कि नासा में इतने भारतीय है, अमेरिका में इतने डॉक्टर भारतीय है। दुनिया के कोने कोने में भारतीय प्रतिभा अपना डंका बजा रही है और हम भारतीय उनकी उन्नती देखकर ,उनकी प्रशंसा सुनकर ख़ुश होते हैं । हाँ! हाँ , होना भी चाहिए क्योंकि वह हमारे लोग हैं , वो भारतीय है , हमें उन पर गर्व है ,हमें उन पर नाज़ है। हमें उनपर अभिमान है , पर सोचने वाली बात यह है कि जो कार्य वे दूसरे देश में करके वाहवाही लूट रहे हैं , क्या वह कार्य वे हमारे भारत में नहीं कर सकते थे? सोचो, सभी भारतीय सोचो!
नहीं !बिलकुल नहीं ! वो कार्य वे हमारे भारत देश में शायद नहीं कर सकते थे। सोचो , दिमाग़ पर ज़ोर देकर सोचो ।आख़िर ये प्रतिभाएँ अपना देश छोड़कर , अपनों से दूर कही नयी जगह पर अपना भविष्य बनाने क्यों दौड़ रही है ?हमारा ब्रेन ड्रेन (Brain Drain) क्यों हो रहा है ?सोचो !
भारतीय डॉक्टर ने अमेरिका में फेफडे का ट्रांसप्लांट किया ये सुनकर हम कोरोना काल में भी अभीभूत हो गए ।भारत में अपनी 130 करोड़ की जनता है और होनहार डॉक्टर है ,यहॉं ये आसानी से हो सकता था ,पर नहीं ! क्यों ?
हमारा भारत दुनिया में पहला और आख़िरी देश है जहाँ की शिक्षा प्रणाली , सर्विस प्रणाली ऐसी है जहाँ पर Deserving कैंडिडेट की जगह Reserved कैंडिडेट की प्रणाली चलती है । हम भारतीयों को सिर्फ़ 10 साल के लिए रिज़र्वेशन दिया गया था पर आज सात दशक पूरे होने के बाद भी उस संख्या में कमी आने की बजाय इज़ाफ़ा ही हुआ है । जब भी कोई नई सरकार सत्ता में आती है , अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए किसी जाति को या किसी वर्ग को रिज़र्वेशन का ऐलान कर देती है और जनरल लोग मुँह ताकते हुए ठगे से रह जाते हैं।
उनकी समझ में कुछ आए उसके पहले उनके बच्चे जो कि Deserving कैंडिडेट होते हैं , वे अपने आपको इतना लाचार और असहाय समझते हैं कि उन्हें अपना देश ,अपना परिवार ,अपना शहर छोड़कर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है और यही वो ब्रेन ड्रेन होता है ।जो अपने देश की उन्नति के लिए काम करना चाहता था वो आज दूसरे देश के लिए दिन रात एक कर रहा है।
आज रिज़र्वेशन में भी प्रतिभा है ।वे प्रतिभाशाली छात्र रिज़र्वेशन से अपना हक लेना अपनी तोहिन समझते हैं और अपनी प्रतिभा के आधार पर वे प्रतिभावान अनरिज़र्व सीट यानी जनरल सीट लेकर शान से जीते हैं ।गलती उनकी नहीं है । उनके पास प्रतिभा थी जिसका उन्होंने उपयोग किया और अपना हक़ जताया । पर इसका नुक़सान किसे हुआ ?उसी जनरल कैटिगरी को जिसका हक़ और छीन लिया गया और वह बिचारा मायुस होकर इस प्रणाली को कोसता हुआ चुपचाप अपना बोरिया बिस्तर उठाकर चल पड़ा अपना देश छोड़कर किसी और ज़मीन पर अपना सपना पूरा करने ।यही है ब्रैन ड्रेन। (Brain Drain).
आज हम 130 करोड़ की जनता चाहे तो क्या नहीं कर सकती ! अपने देश को किसी भी ऊँचाई तक ले जा सकती है । पर क्या कभी ऐसा होगा ? नहीं , शायद नहीं !जब तक हमारा ब्रेन बाहर जाता रहेगा तब तक शायद नहीं ।
आज तक का इतिहास उठाकर देख लो ,जिस भी पार्टी को वोट चाहिए वह रिज़र्वेशन को बढ़ावा दे देती है और जिसे रिज़र्वेशन चाहिए वो रेल पटरी उखाड़कर ,गाड़ियां जलाकर ,सरकारी संपत्ति को नुक़सान पहुंचाकर अपने पक्ष में फ़ैसला कर ही लेते हैं और जनरल पब्लिक ताकती रह जाती है । कभी आपने सपने भी सुना हो कि पूरे देश को रिज़र्वेशन मुक्त करने के लिए किसी ने गाड़ियां जलायी हो,ट्रेन रोकी हो, ट्रेन की पटरी उखाड़ी हो या भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे हो। शायद यह सपना कभी देखा ही नहीं जाएगा , हक़ीक़त तो बहुत दूर की बात है।
आज आज़ादी के 70 साल बाद भी हम पिछड़े तबकों का विकास नहीं कर पाए तो लानत है राज करने वाले उन लोगों पर जो ऐसा नहीं कर पाए । आज सरकार अपने ही देश के साथ खिलवाड़ कर रही है । अगर आपको आज भी कोई पिछड़ा लगता है तो वो आपकी कमी है ,आपके राजनीतिक कार्यकाल की कमजोरी है। आप उनका विकास नहीं कर पाएँ।इसमें जनरल पब्लिक की कोई गलती नहीं है , उसके लिए बिचारी वो जनता क्यों भुगत रही है । आप उन्हें मुफ़्त में शिक्षा दें , खाना दें , कपड़ा दें , मकान दें, बिजली , पानी सब दें और कहो उन्हें , अपनी प्रतिभा का लोहा मनवायें। किसी को एतराज़ नहीं होगा उन्हें दी हुई मुफ़्त सेवाओं पर ।सब चाहते हैं उनका विकास हो , लेकिन अपने देश की उन्नति को ताक पर रखकर नहीं । उनका विकास उन्हें मुख्यधारा में लाना , उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना होगा न कि किसी को रिज़र्वेशन देकर देश की जनता के साथ , उनकी सेहत के साथ ,उनके जानमाल के साथ ,देश की उन्नति के साथ खिलवाड़ करना ।डीज़र्र्विंग कैंडिडेट और रिज़र्व कैंडिडेट का फ़र्क मत कीजिए जिससे अपना ही Brain दूसरे देश की माटी में Drain होता चला जाए और हम देखते रह जाएं।
अन्याय करना पाप है तो अन्याय सहना भी पाप है ।
जागो , जनता जागो !
अभी भी वक़्त है , राजनेता जातिवाद से ऊपर उठकर अपने देश का विकास सोचे , अपने देश के भविष्य के बारे में
सोचे । देशभक्ति की वो मिसाल क़ायम करने के लिए शायद किसी अवतार का इस भारत भूमि पर अवतरित होना अभी बाक़ी है ।
डॉक्टर मंजू राठी
M B B S . M D.
LLB. LLM