“सोच बदलें और अपना विकास करें “

“सोच बदलें और अपना विकास करें “

जागो ,जनता जागो!

कुछ दिन पहले TV पर देखा , दुबई में बुर्ज ख़लीफ़ा जो सबसे ऊँची इमारत है वहाँ पर एक जोड़े ने लाखों रुपये ख़र्च करके शानदार जश्न मनाया ।

कारण था ,

“जोड़े के अजन्मे बच्चे के लिंग का पता चलना “

वाह ! क्या बात है ! अपने अजन्मे बच्चे का लिंग यानी लड़का है या लड़की है यह मालूम चलने पर उस जोड़े ने शानदार जश्न मनाया और सारी दुनिया ने उसे TV पर

देखा ।

मन में इच्छा हुई , काश़ ! हमारे यहाँ भी ऐसा होता ! हम भी ऐसा जश्न मना पाते ! हम भी ऐसा कर पाते हैं !

आज विश्व में अनेक ऐसे देश हैं जहाँ गर्भ में ही लिंग का पता करना क़ानूनन वैध है पर हमारे देश में ऐसा नहीं है ।

क्यों ?

कही जनता आप तो इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं है ?

सोचो , जनता सोचो !

लड़का और लड़की दोनों एक समान है ।संविधान ने भी दोनों को एक समान हक़ दिया है ।फिर हम इन्सान उनमें भेद क्यों करते हैं क्? या हम दोनों को एक जैसी परवरिश नहीं दे सकते ? क्या हम दोनों को एक जैसा नहीं मान सकते है ? क्या फ़र्क है लड़का और लड़की में आज के ज़माने में ! दोनों ही तो बराबर है । फिर हमारे देश में ही ऐसा क्यों है ? जनता कहीं आपकी सोच में तो फ़र्क नहीं है !

जागो ,जनता जागो !

जनता की सोच के लिए कई हम किसी और को तो ज़िम्मेदार नहीं ठहरा रहे हैं ? क्या इस सोच के लिए वह सोनोग्राफी मशीन ज़िम्मेदार है जिसे हमने बेड़ियों में जकड़ रखा है । जिसे अपनी सेवाएँ सब जगह पर देनी चाहिए चाहे वो ऑपरेशन थियेटर हो ,डिलीवरी रूम हो , या आयी सी यू हो , या और कोई वॉर्ड हो जहाँ पर सोनोग्राफी मशीन चलकर जा सके । जिससे मरीज़ को तुरंत उसके पास सुविधा उपलब्ध हो जाएं और न कि मरीज़ को उसके पास चलकर जाना पड़े जो कि उस गंभीर अवस्था में उसके लिए मुश्किल होता है । क्या हमारे ही भारत में सोनोग्राफी को सिर्फ़ गर्भवती महिला के भ्रूण के लिंग जाँच के लिए ही उपयुक्त है ऐसा मानते हैं? क्या उसके और कोई फ़ायदे नहीं है ? क्या जनता को यह फ़ायदे समझ में नहीं आते ? जनता अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारने पर तुली हुई है । क्यों सस्ती जाँच को मेहंगी बना दिया गया है ? क्या जनता स्वयं उसके लिए ज़िम्मेदार नहीं है? क्या लिंगानुपात के लिए यह ग़रीब सोनोग्राफी मशीन ज़िम्मेदार है? क्या यह जनता , जनता की सोच , यह देश उसकी सोच , उसकी परम्पराएँ , यहाँ की समस्याएँ , यहाँ की क़ानून व्यवस्था और एेसे अनेक कारण ज़िम्मेदार नहीं है ? हम यह कब समझेंगे ? हम इस आसान जाँच वाली मशीन को क़ैद करके कब तक रखेंगे ?

कब तक हम हमारे ही पावँ पर कुल्हाड़ी मारते रहेंगे ?

सोचो , ज़रा सोचो !

और हाँ डॉक्टर , आप भी इसके बारे में सोच सकते हैं !डॉक्टर , क्या आप अपनी लड़ाई कोई और लडने का इंतज़ार करेंगे ?

जनता क्या आप अपनी लड़ाई स्वयं नहीं लड़ेंगे ?

जनता क्या आप अपनी सोच कभी नहीं बदलेंगे ?

सोचो , ज़नता सोचो!

डॉक्टर मंजू राठी

M B B S . M D.

L L B . L L M

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