जिताऊ और टिकाऊ उम्मीदवार की परिभाषा

जागो ,जनता जागो!
“जिताओ और टिकाऊ उम्मीदवार को ही टिकट मिलेगा !”
वाह ! क्या बात है ! आख़िर जिताऊ और टिकाऊ उम्मीदवार की परिभाषा क्या है? कौन उम्मीदवार जिताऊ है और कौन टिकाऊ है , इसका फ़ैसला कौन करेगा ? जनता या किसी पार्टी के आलाकमान जो जनता से मिलने अपने वातानुकूलित कमरे से कभी बाहर ही नहीं निकले हो । जिसके लिए चुनाव हो रहे है वह जनता तो अभी जागी ही नहीं है ! उसे तो पता ही नहीं कि जिताऊ और टिकाऊ उम्मीदवार क्या होता है ? उसे तो ये भी पता नहीं कि उसे जिताऊ और टिकाऊ उम्मीदवार को वोट देना है ! उसे किसी ने पूछा भी नहीं ,ऐ जनता , तुम क्या चाहती हो ? तुम्हें कैसा उम्मीदवार चाहिए ? पढ़ा -लिखा , अनपढ़ , काम करने वाला , अमीर , ग़रीब , भ्रष्ट , ईमानदार या फिर सिर्फ़ जिताऊ । फिर जीतने के लिए वह साम , दाम , दंड , भेद कुछ भी अपना लें , जनता कभी उसमें दखलअंदाजी नहीं करेगी । जीतने के बाद जो पैसा उसने इन संसाधनों में ख़र्च किया वह तो जनता से ही वसूलना है! कोई अपनी जेब ख़ाली करके आपके लिए काम करेगा? कभी इस बारे में सोचा है आपने ?
शायद नहीं ! तो अब वक़्त आ गया है सोचने का और सोच कर अमल में लाने का । आपको सोचना है जनता , की आपको कैसा उम्मीदवार चाहिए ? आपके अपनों में से कोई एक जो भले ही अमीर न हो पर ईमानदार हो, वो भले ही किसी पार्टी से जुड़ा न हो पर काम करने की ललक हो , जो भ्रष्ट न हो , जो आपका अपना हो , जो आपकी समस्या समझता हो ,ऐसे उम्मीदवार को आपको चुनना है । सभी राजनीतिक पार्टियां अगर जिताऊ उम्मीदवार चाहती है तो सोचो , फिर हारेगा कौन? जितना तो सिर्फ़ एक को है फिर वो आपका अपना क्यों न हो! जिताऊ उम्मीदवार हार गया तो आख़िर में हार किसकी हुयी ? हारी तो जनता ही ना ! जिताऊ समझ कर जिसे वोट दिया वह हार गया और आपका वोट व्यर्थ गया तो किसे दुख होगा ?
तो सोचो , जनता सोचो ! आप कैसे फ़ैसला करेंगे ? अपने दिमाग़ से सोचो एकजुट होकर अपना विकास यही ध्येय रखो । और हाँ , यह तो मेरी समझ में नहीं भी नहीं आया कि “टिकाऊ “ क्या होता है? जैसे कोई उम्मीदवार उस पार्टी में रहेगा की नहीं इसलिए टिकाऊ या फिर कपड़े धोने वाले साबुन के विज्ञापन की तरह टिकाऊ । आख़िर टिकाऊ क्या होता है ? एक बार जीत कर आ गया तो 5 साल तो वैसे ही टिकाऊ होता है फिर ये टिकाऊ क्या है ?
सोचो ,जनता सोचो !
जनता , अब तो जाग जाओ ! अपना विकास अपने हाथ में है । किसी और की कठपुतली बनने से अच्छा है अपनों का हाथ थामो और स्वयं ही उस पथ की ओर अग्रसर हो चलो , जहाँ सभी का मुक़ाम है ! याद रहे जनता , की स्वयम की भागीदारी ही जनता का भविष्य तय करेगी ।
जागो , जनता जागो !
जिताओ और टिकाऊ उम्मीदवार के फेरे में कहीं जनता , आप अपने आपको ना हार जाओ !
जागो ,जनता जागो!
डॉ. मंजू राठी
M B B S . M D
L L B. L L M