चुनावी बिगुल

जागो ! जनता जागो!

अख़बार में फ़ोटो देखी, आधे पेज के विज्ञापन में सरपंच बनी महिला का माला पहने हुए कोने में एक छोटा -सा फ़ोटो और मालाओं से लदा हुआ उनके पति का पूरा फ़ोटो और नीचे लिखा था “सरपंच का पत्ती “ ।

वाह ! देखकर अनायास ही हँसी आ गई । सरपंच बनी वो महिला और वाहवाही ले रहा था उनका पति। जनता ने किसे सरपंच चुना ? सवाल मन में उठ खड़ा हुआ । जनता ने किसे वोट दिया ? क्या जनता को इतना भी वक़्त नहीं मिला कि वह यह सोचे कि वो किसे चुनकर अपना नेता बना रही है ? पूरे गाँव में एक ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जिसे जनता चुनें और वो पूरी मेहनत से जनता के लिए काम करें।

जैसे ही चुनावी बिगुल बजता है, सारी पार्टियां अपने नाते , रिश्तेदारों या दोस्तों या जानकारों को चुनावी जंग में उतार देती है और अपनी चुनावी रणनीति बनाना शुरू कर देती है ।पर ये जो “भोली भाली जनता “ है , जो वोट करने वाली है , जिसके लिए चुनाव हो रहे हैं उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं होता । वह तो आराम से सो रही होती है । जिस दिन चुनाव होगा , उस वक़्त जाकर ठप्पा लगाना है , फिर कोई भी जीते या हारे हमें कोई फ़र्क नहीं पड़ता । दो चार दिन चर्चा करेंगे और सब भूल जाएंगे । राज तो उम्मीदवार के रिश्तेदारों को ही करना है । जनता बेचारी क्याें उस पचड़े में पड़े । वोट दो और काम ख़त्म करो ।

वाह री जनता !

जागो , मेरी प्यारी जनता , जागो !

जैसे ही चुनावी बिगुल बजता है , अब आप भी जागो , अपने अंदर झाँको और देखो कौन आपका सच्चा सहायक है। जैसे पार्टियां तैयारी में जुट जाती है वैसे आप भी जुट जाइये और देखिए आप में से ही कोई ऐसा व्यक्ति जो वाकई इसके क़ाबिल हो , पढ़ा लिखा हो, आपका दुख दर्द समझता हो , ऐसे इंसान की खोज करने में जुट जाइये , जो आपका भविष्य उज्जवल कर सकता है । पार्टियों से आपको कोई लेना देना नहीं है । पार्टियाँ अपना स्वयं का भविष्य देखती है और आपको अपना भविष्य देखना है। ढूंढने से तो भगवान भी मिल जाता है , फिर ऐसा इंसान ढूंढना कोई बड़ी बात नहीं है , ऐसे लोगों की दुनिया में कोई कमी नहीं है जो नि: स्वार्थ भाव से जनता की सेवा करना चाहते हो | क्याें उन्हें हम मौक़ा नहीं देते? क्यों उन्हें अपना नेता नहीं चुनते ? एक बार उन्हें हाथ पकड़कर सामने लाइए और फिर देखिए आपका विकास कैसे होता है । वोट आपका अधिकार है , उसका उपयोग किसी ऐरे गैरे के लिए मत कीजिए । आपके अधिकार को अपनी ताक़त बनाइए और अपना स्वयं का भविष्य उज्जवल करने की स्वयं कोशिश कीजिए । आँख बंद करके तमाशा देखने से अच्छा है स्वयं सक्रिय होकर अपना नेता स्वयं ढूंढें और अपना स्वयं का विकास स्वयं करें । कोई दूसरा आकर आपकी मदद नहीं करेगा यह हमेशा ध्यान रहे । स्वयं को स्वयं की मदद करनी ही पड़ेगी तभी आप सशक्त बनोगे वरना “ भोली भाली जनता “ का तमग़ा आप पर हमेशा चस्पा रहेगा और कोई भी ऐरा गैरा आपको बेवक़ूफ़ बनाकर आप पर राज करेगा ।

चुनावी बिगुल बज चुका है ।जनता अब जाग जाइए । अपना भविष्य अपने हाथों से लिखीए।

जागो ,जनता जागो!

डॉक्टर मंजू राठी

MBBS MD

LLB LLM

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